ट्रम्प के टैरिफ वार का बड़ा असर: जर्मनी ने ग्रीनलैंड से वापस बुलाई सेना, 8 देश अब भी अमेरिका के सामने अड़े…NV News
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डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित नए टैरिफ और व्यापारिक दबाव का असर अब वैश्विक स्तर पर सैन्य और रणनीतिक बदलावों के रूप में दिखने लगा है। जर्मनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ग्रीनलैंड से अपनी सेना वापस बुलाने का कदम उठाया है। इसे ट्रम्प की सख्त आर्थिक नीतियों और टैरिफ की धमकियों के प्रत्यक्ष प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। जर्मनी के इस फैसले ने यूरोप के अन्य देशों के बीच हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
जर्मनी का यह पीछे हटना दिखाता है कि अमेरिका की नई आर्थिक नीतियों ने यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा और विदेश नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह उन देशों पर भारी टैरिफ लगाएगा जो अमेरिकी हितों के साथ तालमेल नहीं बिठाते। जर्मनी, जो यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, अब अमेरिका के साथ व्यापारिक युद्ध के जोखिम को कम करने के लिए अपने सैन्य खर्चों और विदेशी तैनाती में कटौती कर रहा है।
हालांकि, जर्मनी के विपरीत 8 अन्य देश अभी भी अपनी स्थिति पर अडिग हैं और उन्होंने अमेरिका के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। इन देशों का मानना है कि टैरिफ का दबाव केवल एक पक्षीय है और वे अपनी संप्रभुता तथा रणनीतिक हितों के साथ समझौता नहीं करेंगे। ग्रीनलैंड में इन देशों की मौजूदगी और अमेरिका के साथ जारी यह तनातनी वैश्विक भू-राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है, जहाँ व्यापारिक हितों और सैन्य समझौतों के बीच की लकीर धुंधली होती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह व्यापारिक तनाव और बढ़ता है, तो नाटो (NATO) जैसे संगठनों के भीतर भी दरारें आ सकती हैं। जर्मनी का यह कदम भविष्य में अन्य यूरोपीय देशों के लिए एक नजीर बन सकता है या फिर यह उन 8 देशों के इरादों को और मजबूत कर सकता है जो अमेरिका की आर्थिक धमकियों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ट्रम्प के अगले कदम और ग्रीनलैंड में बदलते रक्षा समीकरणों पर टिकी हैं।
