Tribal Villages Power Crisis: अंधेरे में ज़िंदगी, बिजली की मांग पर आदिवासियों का हाईवे पर हल्ला-बोल

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गरियाबंद। Tribal Villages Power Crisis, मैनपुर क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य राजा पड़ाव इलाके में बिजली की मांग को लेकर एक बार फिर जनआक्रोश फूट पड़ा। क्षेत्र के 8 पंचायतों के 30 गांवों से पहुंचे दो हजार से अधिक महिला-पुरुषों ने नेशनल हाईवे 130-सी को जाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

Rural Electrification Protest, ग्रामीणों का कहना है कि आज़ादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद उनके गांव आज भी अंधेरे में डूबे हुए हैं, जबकि कई बार आश्वासन और मंजूरी के बाद भी बिजली अब तक नहीं पहुंच सकी।

कोर जोन में अटकी अंडरग्राउंड बिजली योजना

Rural Electrification Protest, राजा पड़ाव क्षेत्र उदंती-सीता नदी अभयारण्य के कोर जोन में आता है। यहां पर्यावरणीय कारणों से अंडरग्राउंड विद्युत लाइन बिछाने की प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी थी।

जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि योजना को मंजूरी मिलने के बावजूद बजट की कमी के चलते अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

सालभर में चौथी बार हाईवे जाम

Rural Electrification Protest, मैनपुर ब्लॉक के इस इलाके में बीते एक वर्ष के भीतर यह चौथी बार है जब ग्रामीणों को बिजली के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है।

प्रदर्शन का नेतृत्व अम्बेडकरवादी समिति के अध्यक्ष पतंग नेताम, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम कर रहे थे।

पेसा कानून और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप

Rural Electrification Protest, जनप्रतिनिधियों ने कहा कि राजा पड़ाव क्षेत्र भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र है, जहां पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम 1996 यानी पेसा कानून लागू होता है।

इसके बावजूद यहां के आदिवासी समुदायों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों में से केवल अड़गड़ी, शोभा और गोना पंचायतों में आंशिक रूप से बिजली पहुंची है, जबकि भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव जैसे पंचायतों के ग्रामीण आज भी अंधकार में जीवन जीने को मजबूर हैं।

बिजली सिर्फ सुविधा नहीं, मूल अधिकार का सवाल

Rural Electrification Protest, ग्रामीणों का कहना है कि बिजली का अभाव बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की सिंचाई, स्वास्थ्य सेवाओं और सूचना तक पहुंच को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।

यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 21 (सम्मानजनक जीवन), अनुच्छेद 21-क (शिक्षा का अधिकार) और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

2023 के बाद अचानक रुका काम, उठे सवाल

Rural Electrification Protest, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 तक विद्युतीकरण का कार्य शुरू हुआ था, लेकिन बिना किसी स्पष्ट प्रशासनिक आदेश के काम रोक दिया गया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सुशासन और विधि के शासन के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।

राज्यपाल के नाम सौंपेंगे ज्ञापन

Rural Electrification Protest, आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने की बात कही है, ताकि उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिलाए जा सकें।

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