रिश्वत के दाग, जेल की हवा और खाकी का खौफ… कौन हैं विवादों के ‘किंग’ आरोपी SDM करुण डहरिया?…NV News

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बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में आज एक ही नाम की चर्चा है—करुण डहरिया। कभी सत्ता और रसूख के केंद्र में रहने वाले एसडीएम करुण डहरिया आज सलाखों के पीछे पहुँचने की तैयारी में हैं। एक आदिवासी बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या करने और माफियाओं को संरक्षण देने के आरोपों ने उनकी खाकी और प्रशासनिक साख पर कालिख पोत दी है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब डहरिया का नाम विवादों में आया है; उनका इतिहास भ्रष्टाचार और विवादित कार्यप्रणाली से भरा रहा है।

रिश्वतकांड और जेल की सलाखें

करुण डहरिया का विवादों से रिश्ता पुराना है। साल 2021-22 के दौरान जब वे रायपुर के पास आरंग में पदस्थ थे, तब उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने उन्हें एक किसान से जमीन संबंधी काम के बदले मोटी रकम की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इस घटना के बाद उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी थी और लंबे समय तक वे सेवा से निलंबित रहे थे।

विवादित बहाली और फिर वही रवैया

हैरानी की बात यह है कि रिश्वतकांड जैसे गंभीर मामले के बावजूद वे बहाल हुए और उन्हें फिर से मैदानी पोस्टिंग मिल गई। बलरामपुर के कुसमी में पदस्थापना के बाद उन पर ‘बॉक्साइट माफिया’ के साथ सांठगांठ के आरोप लगने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि डहरिया अक्सर ग्रामीणों को डराने-धमकाने और उन पर प्रशासनिक धौंस जमाने के लिए कुख्यात रहे हैं।

हत्या का संगीन आरोप

ताजा मामला उनके करियर का सबसे काला अध्याय साबित हो रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर एक आदिवासी ग्रामीण की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उसकी मौत हो गई। पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है। एक राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) पर इस तरह का संगीन मामला दर्ज होना यह बताता है कि उन्होंने मर्यादा की सारी हदें पार कर दी थीं।

करुण डहरिया की इस प्रोफाइल से यह सवाल उठता है कि भ्रष्टाचार में लिप्त और जेल जा चुके अधिकारियों को आखिर महत्वपूर्ण पदों पर दोबारा क्यों बिठाया जाता है? फिलहाल, प्रशासन ने उन्हें पद से हटा दिया है और वे पुलिस रिमांड पर हैं।

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