महाविनाश की आहट! रूसी कंपनी Rosatom की चेतावनी- ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला ‘आउट ऑफ कंट्रोल’, दहशद में दुनिया…NV News

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मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी तनाव अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है जहाँ से पूरी मानवता पर संकट मंडराने लगा है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम (Rosatom) ने एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ईरान के परमाणु संयंत्र पर हुआ हमला “आउट ऑफ कंट्रोल” (नियंत्रण से बाहर) हो चुका है। रोसाटॉम के मुताबिक, संयंत्र के तकनीकी ढांचे को पहुंची क्षति इतनी गंभीर है कि उसे सामान्य करना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन चिंताओं को सच साबित कर दिया है कि यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक वैश्विक परमाणु आपदा की शुरुआत हो सकती है।

रोसाटॉम, जो ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र सहित कई प्रोजेक्ट्स में मुख्य सहयोगी रही है, ने स्पष्ट किया कि रिएक्टर के सुरक्षा कवच और कूलिंग सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। कंपनी के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति को अगले कुछ घंटों में काबू नहीं किया गया, तो रेडियोधर्मी विकिरण (Radiation) का रिसाव शुरू हो सकता है। यह विकिरण न केवल ईरान की सीमा तक सीमित रहेगा, बल्कि हवा के रुख के साथ पड़ोसी देशों और पूरे मध्य-पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है। रूस ने इस घटना को “परमाणु आतंकवाद” की श्रेणी में रखते हुए दुनिया को संभावित तबाही के प्रति आगाह किया है।

इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और संयुक्त राष्ट्र में खलबली मच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु संयंत्र पर हमला करना जिनेवा कन्वेंशन का खुला उल्लंघन है। हालांकि, ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर हताहतों और विकिरण के स्तर की जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन रोसाटॉम जैसे तकनीकी पार्टनर का यह कहना कि स्थिति “बेकाबू” है, मामले की गंभीरता को कई गुना बढ़ा देता है। दुनिया भर के शेयर बाजारों और तेल की कीमतों में इस खबर के बाद भारी गिरावट और अस्थिरता देखी जा रही है।

वैश्विक शक्तियों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जहाँ एक तरफ ईरान के समर्थक देश इसे विश्व युद्ध की आहट बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह हमला मिसाइल से हुआ है या किसी साइबर हमले के जरिए संयंत्र की प्रणालियों को ठप किया गया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि यदि रेडिएशन लीक होता है, तो यह चेरनोबिल से भी बड़ी त्रासदी साबित हो सकता है। पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान और रूस के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इस विनाशकारी संकट को रोकने का कोई रास्ता बचा है।

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