बांग्लादेश में ‘रहमान युग’ का आगाज: 35 साल पुरानी परंपरा तोड़ तारिक रहमान संभालेंगे कमान, ये हैं दो बड़ी चुनौतियां…NV News

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बांग्लादेश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है। 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद वतन लौटे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान आज देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह ढाका स्थित जातीय संसद के ‘साउदर्न प्लाजा’ में आयोजित किया जा रहा है, जहाँ राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। तारिक रहमान की यह जीत न केवल BNP की सत्ता में वापसी है, बल्कि यह देश की दशकों पुरानी राजनीतिक परंपरा को भी बदलने जा रही है।

इस शपथ ग्रहण के साथ ही बांग्लादेश में 35 साल पुरानी उस परंपरा का अंत हो गया है, जिसे ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ कहा जाता था। 1991 के बाद से बांग्लादेश की सत्ता लगातार दो महिलाओं—खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच घूमती रही थी। तारिक रहमान पिछले साढ़े तीन दशकों में देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे। उनकी पार्टी ने हालिया आम चुनावों में 212 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जिसे जनता ने ‘बदलाव का जनादेश’ करार दिया है।

शपथ ग्रहण से पहले तारिक रहमान ने देश के सामने मौजूद दो सबसे बड़ी चुनौतियों का स्पष्ट उल्लेख किया है। उनकी पहली प्राथमिकता चरमराई हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और महंगाई से जूझ रही जनता को राहत देना है। दूसरी बड़ी चुनौती देश में कानून व्यवस्था को बहाल करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास फिर से जगाना है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार ‘जुलाई चार्टर’ के तहत शासन करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा और न्यायिक स्वतंत्रता जैसे सुधार शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस शपथ ग्रहण पर सबकी नजरें हैं। भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिसरी इस समारोह में शामिल हो रहे हैं। तारिक रहमान ने संकेत दिया है कि उनकी विदेश नीति ‘बांग्लादेश प्रथम’ के सिद्धांत पर आधारित होगी। हालांकि, शेख हसीना के भारत में होने और उनके प्रत्यर्पण जैसे पेचीदा मुद्दों को संभालना नई सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा होगी।

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