न्यायधानी में बेअसर रहा यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ ‘बंद’, आम जनजीवन सामान्य, संस्थानों में कामकाज जारी…NV News
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और नीतियों के विरोध में बुलाए गए ‘बंद’ का असर छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पूरी तरह बेअसर नजर आया। विभिन्न संगठनों द्वारा शिक्षा के व्यवसायीकरण और नए भर्ती नियमों के विरोध में इस हड़ताल का आह्वान किया गया था, लेकिन शहर में इसका कोई व्यापक प्रभाव नहीं देखा गया। सुबह से ही बाजार, परिवहन और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान रोजमर्रा की तरह खुले रहे, जिससे प्रदर्शनकारियों के दावों की हवा निकल गई।
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और शैक्षणिक संस्थानों के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, लेकिन कहीं भी विरोध प्रदर्शन उग्र रूप नहीं ले सका। न्यायधानी के स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति सामान्य रही। हालांकि, कुछ छात्र संगठनों ने प्रतीकात्मक रूप से नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया, लेकिन वे शैक्षणिक गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह विफल रहे। आम जनता और व्यापारियों ने इस बंद से खुद को दूर रखते हुए अपने काम को प्राथमिकता दी।
यूजीसी के जिन नियमों को लेकर विरोध जताया जा रहा था, उनमें मुख्य रूप से नेट (NET) परीक्षा के पैटर्न में बदलाव और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से जुड़े मुद्दे शामिल थे। प्रदर्शनकारी समूहों का तर्क था कि ये नियम छात्रों और शोधकर्ताओं के हितों के खिलाफ हैं। इसके बावजूद, बिलासपुर के शैक्षणिक माहौल पर इसका असर न पड़ना यह दर्शाता है कि संगठन जनता और छात्रों का अपेक्षित समर्थन जुटाने में नाकाम रहे।
शाम होते-होते यह स्पष्ट हो गया कि ‘बंद’ का आह्वान केवल कागजों और सोशल मीडिया तक ही सीमित रह गया। प्रशासन ने भी स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। न्यायधानी में जनजीवन की सामान्य स्थिति ने यह संदेश दिया है कि लोग अब इस तरह के विरोध प्रदर्शनों के बजाय संवाद और सुचारू व्यवस्था के पक्ष में हैं। फिलहाल, शहर में स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी हुई है।
