बस्तर में माओवाद के ‘प्रतीकों’ का अंत: एक वर्ष में 70 से अधिक नक्सली स्मारक ध्वस्त; साय-शाह की जोड़ी का ‘बुलडोजर एक्शन’ जारी…NV News
Share this
बस्तर के जंगलों में कभी खौफ का प्रतीक माने जाने वाले माओवादी नेताओं के स्मारक अब ढह रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष के भीतर 70 से अधिक ऐसे ढांचों को सुरक्षा बलों ने बुलडोजर और अन्य माध्यमों से ध्वस्त कर दिया है। ये स्मारक अक्सर उन गांवों और इलाकों में बनाए गए थे जहाँ सुरक्षा बलों की पहुंच कम थी, ताकि ग्रामीणों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके।
हालिया कार्रवाई: बीजापुर में 6 और स्मारक ध्वस्त
ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी 2025-2026 के दौरान बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में एक बड़ा अभियान चलाया गया। केवल पिछले दो दिनों (13-14 फरवरी 2026) में ही सुरक्षा बलों ने 6 स्मारकों को मटियामेट किया है।
प्रमुख नाम: हाल ही में इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में भाकपा (माओवादी) के पूर्व शीर्ष नेता बसव राजू और दिग्गज नक्सली रमन्ना के स्मारकों को भी गिरा दिया गया है।
स्थान: तर्रेम और उसूर थाना क्षेत्रों के मांडिमरका, मारुधबाका, पौरगुडा और सिंगनपल्ली जैसे घने जंगलों में यह कार्रवाई की गई।
मनोवैज्ञानिक युद्ध में सुरक्षा बलों की बढ़त
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ये स्मारक केवल पत्थर के ढांचे नहीं, बल्कि माओवादियों के ‘शहादत’ के नैरेटिव और जबरन भर्ती का जरिया थे। इन्हें गिराने का उद्देश्य ग्रामीणों के मन से नक्सलियों के वर्चस्व के भ्रम को तोड़ना है।
बदलाव की लहर: बीजापुर के स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, “इन स्मारकों के हटने के बाद अब गांवों में विकास की सड़कें पहुंच रही हैं और बच्चों के लिए स्कूल फिर से खुल रहे हैं। अब पोस्टर की जगह विकास दिख रहा है।”
मिशन 2026: माओवाद मुक्त भारत का लक्ष्य
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में ‘बस्तर पंडुम 2026’ के दौरान दोहराया था कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दिशा में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी सख्ती दिखाई है। एक तरफ जहां सरेंडर करने वालों के लिए आकर्षक पुनर्वास नीति है, वहीं दूसरी ओर हथियारबंद नक्सलियों के ठिकानों और स्मारकों पर कड़ा प्रहार जारी है।
