सेंट्रल जेल में पूर्व जनपद सदस्य की संदिग्ध मौत: कांग्रेस ने बनाई 7 सदस्यीय जांच समिति, जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
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रायपुर। पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष और सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष जीवन ठाकुर की रायपुर सेंट्रल जेल में हुई संदिग्ध मौत ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। घटना को गंभीर मानते हुए कांग्रेस ने 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है। कांग्रेस का आरोप है कि जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही के कारण जीवन ठाकुर की मौत हुई, इसलिए विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है।
कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
कांग्रेस द्वारा गठित जांच समिति का संयोजन पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया को सौंपा गया है। समिति में विधायक सावित्री मंडावी, इंदर शाह मंडावी, जनक ध्रुव और अंबिका मरकाम सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। समिति पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी।
अंतिम संस्कार 6 दिसंबर को, परिवार में आक्रोश
कांकेर जिले के चारामा जनपद के पूर्व अध्यक्ष जीवन ठाकुर का अंतिम संस्कार 6 दिसंबर को उनके गृह ग्राम मायना में किया गया। परिवार और स्थानीय आदिवासी समाज ने मौत को संदिग्ध बताते हुए जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
2 दिसंबर को बिना सूचना जेल शिफ्ट किया गया
परिजनों का आरोप है कि 2 दिसंबर को उन्हें रायपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया, लेकिन इसकी कोई सूचना परिवार को नहीं दी गई। न तो तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी गई और न ही अस्पताल ले जाने की।
4 दिसंबर को सुबह मौत, सूचना शाम को
वायरलेस संदेश के अनुसार, 4 दिसंबर की सुबह 4:20 बजे जीवन ठाकुर को डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल, रायपुर (मेकाहारा) में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों ने 7:45 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।
चौंकाने वाली बात यह है कि परिवार को शाम 5 बजे के करीब मौत की जानकारी दी गई, जिससे परिजनों और समाज में और अधिक आक्रोश फैल गया।
आदिवासी समाज ने उठाए सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधि और आदिवासी समाज ने कहा कि यदि समय रहते परिवार को सूचना दी जाती और उचित चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती, तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी।
जांच समिति जल्द करेगी रिपोर्ट पेश
कांग्रेस ने कहा कि जब तक इस मौत के असली कारणों की जांच नहीं हो जाती, पार्टी इसे जनता के सामने उठाती रहेगी। समिति जल्द ही जेल प्रशासन, अस्पताल रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करेगी।
