छत्तीसगढ़ में अवैध मतांतरण पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: साय सरकार बजट सत्र में लाएगी नया कानून, दोषियों को होगी उम्रकैद!…NV News
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छत्तीसगढ़ में अवैध मतांतरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने धर्मांतरण को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों को और अधिक सख्त बनाने का निर्णय लिया है। सरकार आगामी विधानसभा के बजट सत्र में नया ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026’ (Freedom of Religion Bill) पेश करने जा रही है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य प्रलोभन, बल प्रयोग, या धोखे से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर पूर्णतः अंकुश लगाना है।
नए कानून में सजा के कड़े प्रावधान
प्रस्तावित विधेयक में सजा के प्रावधानों को पहले के मुकाबले काफी कड़ा किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जबरन या लालच देकर धर्मांतरण कराने वालों को 2 से 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। विशेष रूप से यदि धर्मांतरण किसी नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) वर्ग के व्यक्ति का कराया जाता है, तो सजा और भी गंभीर होगी। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में दोषियों को कड़ी सजा के साथ-साथ संस्थाओं का पंजीकरण रद्द करने का भी प्रावधान है।
धर्म परिवर्तन से पहले कलेक्टर को देनी होगी सूचना
नए कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) के पास एक घोषणा पत्र जमा करना होगा। इसके बाद जिला प्रशासन इस बात की जांच करेगा कि धर्म परिवर्तन के पीछे कोई बाहरी दबाव या प्रलोभन तो नहीं है। जांच पूरी होने और प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही धर्म परिवर्तन को कानूनी मान्यता दी जाएगी। बिना सूचना के किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा।
आदिवासी संस्कृति और पहचान की सुरक्षा
राज्य सरकार का तर्क है कि बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में मतांतरण के कारण सामाजिक समरसता बिगड़ रही है और आदिवासियों की मूल संस्कृति पर खतरा मंडरा रहा है। नया कानून इन क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी होगा। सरकार का मानना है कि सख्त कानून होने से उन ताकतों पर लगाम लगेगी जो भोले-भले ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं।
सियासी घमासान के आसार
बजट सत्र में इस विधेयक के पेश होते ही सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना है। कांग्रेस जहां इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन बता सकती है, वहीं भाजपा इसे अपनी ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की नीति का हिस्सा बता रही है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के दौरान अवैध मतांतरण पर रोक लगाना भाजपा के प्रमुख घोषणापत्र (मोदी की गारंटी) में शामिल था।
