बिलासपुर में छात्र का आत्मघाती कदम: GGU के लॉ स्टूडेंट ने खुद को लगाई आग, 5 दिनों की तड़प के बाद प्रयागराज में तोड़ा दम…NV News

Share this

बिलासपुर: न्यायधानी बिलासपुर के कोनी स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) के एक छात्र की मौत की खबर ने सनसनी फैला दी है। बीए-एलएलबी (BA-LLB) के छात्र आयुष सिंह ने अज्ञात कारणों से खुद को आग के हवाले कर दिया था। लगभग पांच दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित एक अस्पताल में इलाज के दौरान आयुष की सांसें थम गईं। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में मातम और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, आयुष सिंह ने करीब एक सप्ताह पहले आत्मघाती कदम उठाते हुए खुद को जला लिया था। घटना के तुरंत बाद उसे गंभीर हालत में बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। बेहतर इलाज के लिए परिजनों ने उसे प्रयागराज (इलाहाबाद) के बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया था, लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके। आयुष का शरीर 80 प्रतिशत से अधिक जल चुका था, जिससे संक्रमण फैलने की वजह से उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई।

छात्र द्वारा उठाए गए इस चरम कदम के पीछे की वजह अब भी रहस्य बनी हुई है। बताया जा रहा है कि आयुष मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला था और बिलासपुर में कानून की पढ़ाई कर रहा था। विश्वविद्यालय के साथियों का कहना है कि वह स्वभाव से शांत था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह किसी बात को लेकर मानसिक तनाव में नजर आ रहा था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और उसके कमरे से किसी सुसाइड नोट की तलाश की जा रही है ताकि आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा सके।

इस बीच, आयुष की मौत की खबर मिलते ही विश्वविद्यालय के छात्रों में गहरा शोक और गुस्सा है। कुछ छात्रों ने प्रशासन पर छात्र हितों की अनदेखी और तनावपूर्ण माहौल का आरोप लगाया है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि वे इस घटना से स्तब्ध हैं और पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जो अपने बेटे को एक सफल वकील बनता देखने का सपना देख रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

बिलासपुर पुलिस अब आयुष के मोबाइल फोन के रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है। क्या यह किसी व्यक्तिगत समस्या का परिणाम था या पढ़ाई का कोई दबाव, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल, आयुष का पार्थिव शरीर उसके गृह ग्राम ले जाया गया है, जहाँ उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Share this

You may have missed