ईरान युद्ध का साया: भारत के पास 25 करोड़ बैरल तेल का ‘कवच’, जानें संकट के समय कितने दिन चलेगा देश का बैकअप प्लान…NV News
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मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अगर लंबी खिंचती है, तो इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत इस स्थिति को लेकर बेहद सतर्क है। वर्तमान में भारत के पास अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) और रिफाइनरियों के स्टॉक को मिलाकर लगभग 25 करोड़ बैरल तेल का भंडार है। यह भंडार किसी भी आपात स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘बफर’ की तरह काम करता है। भारत ने विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पाडुर में विशाल भूमिगत चट्टानी गुफाओं में कच्चा तेल सुरक्षित रखा है।
विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का यह रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) अकेले लगभग 9.5 दिनों की जरूरत को पूरा कर सकता है। हालांकि, यदि इसमें तेल रिफाइनरियों के पास मौजूद स्टॉक (जो लगभग 64-65 दिनों का होता है) को भी जोड़ दिया जाए, तो भारत के पास कुल 74 से 75 दिनों का बैकअप प्लान तैयार है। इसका मतलब है कि अगर खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई पूरी तरह बंद भी हो जाए, तो भारत ढाई महीने तक बिना किसी बाहरी मदद के अपनी अर्थव्यवस्था और परिवहन को सुचारू रूप से चला सकता है।
ईरान युद्ध के चलते अगर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) जैसा प्रमुख रूट बंद होता है, तो भारत ने वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार की हैं। सरकार रूस, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने पर विचार कर रही है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके। इसके अलावा, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और एथेनॉल ब्लेंडिंग को तेज करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार वैश्विक स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि तेल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी का असर आम जनता की जेब पर कम से कम पड़े।
