धर्मांतरण पर ‘साय’ का वज्रप्रपात: छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित, सीएम बोले- अब नहीं चलेगा छल का खेल…NV News
Share this
छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ (Anti-Conversion Bill) ध्वनि मत से पारित हो गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब प्रदेश में प्रलोभन, दबाव, बल या छल-कपट के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। सीएम ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि उन ताकतों के खिलाफ है जो भोले-भाले लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं।
सदन से विपक्ष का वॉकआउट, सीएम साय ने बताया ‘पलायनवादी’ रवैया
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा सदन से बाहर जाने (वॉकआउट) पर मुख्यमंत्री ने गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण जैसे अति-संवेदनशील और गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष का मैदान छोड़कर भाग जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम साय ने इसे विपक्ष का ‘पलायन’ करार देते हुए कहा कि कांग्रेस कभी भी इस समस्या का समाधान नहीं चाहती थी, इसीलिए वह आज सदन में चर्चा से बच रही है।
कानून की बड़ी बातें: 20 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
नए विधेयक के तहत अवैध धर्मांतरण को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 30 लाख रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग से है, तो सजा और भी कठोर होगी। साथ ही, स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों को अब 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी, जिसकी जांच के बाद ही प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।
धर्मांतरण मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प: ‘चंगाई सभा’ जैसी गतिविधियों पर कसेगा शिकंजा
सरकार का मानना है कि इस कानून से ‘चंगाई सभा’ और आर्थिक लालच देकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर लगाम लगेगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी सदन में कहा कि यह कानून सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। सीएम साय ने अंत में दोहराया कि उनकी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी कीमत पर जनसांख्यिकीय बदलाव की साजिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
