रूस का ‘कयामत का हथियार’: पोसीडॉन टॉरपीडो मिनटों में मिटा सकता है कई शहर, सुनामी लाकर दुश्मन को तबाह करने में सक्षम…NV News

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रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ‘कयामत के हथियार’ कहे जाने वाले ‘पोसीडॉन’ (Poseidon) टॉरपीडो की चर्चा ने दुनिया भर में खौफ पैदा कर दिया है। यह कोई साधारण टॉरपीडो नहीं है, बल्कि एक इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर पावर्ड ऑटोनामस टॉरपीडो है। वैज्ञानिकों और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हथियार समुद्र के अंदर इतना शक्तिशाली विस्फोट कर सकता है कि उससे 500 मीटर तक ऊंची रेडियोधर्मी सुनामी की लहरें उठ सकती हैं, जो किसी भी तटीय शहर को मलबे के ढेर में बदल देंगी।

पोसीडॉन की सबसे बड़ी ताकत इसकी रेंज और रफ्तार है। यह समुद्र की गहराई में हजारों मील का सफर तय कर सकता है और इसकी स्पीड इतनी तेज है कि वर्तमान में दुनिया के किसी भी डिफेंस सिस्टम के पास इसे रोकने का कोई तरीका नहीं है। यह चुपचाप समुद्र की सतह के नीचे चलता है, जिससे रडार या सोनार के जरिए इसका पता लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। रूस का दावा है कि यह हथियार दुश्मन के नौसैनिक अड्डों और तटीय बुनियादी ढांचे को पूरी तरह साफ करने के लिए डिजाइन किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पोसीडॉन का परमाणु वारहेड इतना विशाल है कि इसके फटने से न केवल भौतिक तबाही होगी, बल्कि समुद्र का पानी भी रेडियोधर्मी हो जाएगा। इसके बाद उठने वाली लहरें जिस भी शहर से टकराएंगी, वहां दशकों तक जीवन संभव नहीं होगा। रूस ने इस हथियार को अपनी ‘बेलगोरोद’ (Belgorod) पनडुब्बी पर तैनात किया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी पनडुब्बियों में से एक है। पुतिन ने इसे रूस की रणनीतिक सुरक्षा के लिए एक अपरिहार्य शक्ति बताया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हथियार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि यह युद्ध के नियमों को पूरी तरह बदल सकता है। जहां पारंपरिक मिसाइलों को ट्रैक किया जा सकता है, वहीं पोसीडॉन एक अदृश्य शिकारी की तरह काम करता है। वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि रूस इस हथियार का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और नाटो देशों को सीधी चेतावनी देने के लिए कर रहा है। यह तकनीक सैन्य इतिहास में ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है, जो मानवता के लिए विनाशकारी है।

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