भारत में चावल की खपत: 1 साल का ‘बिरयानी-भात’ गणित…NV News

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“दाल-भात” और “बिरयानी” के शौकीन भारत में चावल की खपत को लेकर एक बेहद रोचक डेटा सामने आया है। भारत सरकार के नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) द्वारा जारी ‘हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे’ (HCES) के अनुसार, एक औसत भारतीय साल भर में काफी मात्रा में चावल “चट” कर जाता है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ दशकों में भारतीयों की डाइट में बदलाव आया है और अब लोग केवल अनाज पर निर्भर रहने के बजाय अन्य खाद्य पदार्थों (जैसे दूध, फल और मांस) की ओर भी बढ़ रहे हैं।

ग्रामीण बनाम शहरी: कौन ज्यादा खाता है चावल?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण भारत में चावल की खपत शहरी इलाकों की तुलना में अधिक है:

ग्रामीण भारत: एक औसत ग्रामीण भारतीय साल भर में लगभग 60 से 65 किलो चावल खाता है।

शहरी भारत: शहरों में यह आंकड़ा थोड़ा कम है, यहाँ प्रति व्यक्ति सालाना खपत लगभग 45 से 50 किलो के बीच है।

सालाना औसत और खपत का ट्रेंड

यदि पूरे देश का औसत (Per Capita Availability) निकाला जाए, तो आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, भारत में खाद्यान्न की प्रति व्यक्ति उपलब्धता बढ़ी है। 2022-23 में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष चावल की औसत उपलब्धता लगभग 75-80 किलो के करीब दर्ज की गई थी, जिसमें वह हिस्सा भी शामिल है जो सीधे भोजन के अलावा अन्य उत्पादों (जैसे आटा, स्नैक्स) में उपयोग होता है।

खपत कम क्यों हो रही है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, 1990 के दशक में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति खपत 80 किलो से अधिक थी, जो अब कम होकर 60-65 किलो पर आ गई है। इसके मुख्य कारण हैं:

डाइट डाइवर्सिफिकेशन: अब लोग केवल पेट भरने के लिए चावल-गेहूं नहीं खाते, बल्कि उनकी थाली में प्रोटीन और विटामिन (दूध, अंडा, सब्जी) की मात्रा बढ़ी है।

शहरीकरण: शहरों में ‘फास्ट फूड’ और ‘प्रोसेस्ड फूड’ के बढ़ते चलन ने पारंपरिक ‘भात’ की जगह कम की है।

स्वास्थ्य जागरूकता: शुगर और मोटापे के डर से कई लोग अब सफेद चावल की मात्रा सीमित कर रहे हैं।

क्षेत्र मासिक खपत (अनुमानित) सालाना खपत (अनुमानित)

ग्रामीण भारत 5.2 – 5.5 किलो 60 – 65 किलो

शहरी भारत 3.8 – 4.2 किलो 45 – 50 किलो

अंतिम औसत (उपलब्धता) ~6.5 किलो ~78 किलो

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