राजनांदगांव: सरकारी खजाने पर ‘डाका’, फर्जी नियुक्ति पत्र के दम पर 8 लोग सालों तक रहे ‘सरकारी मेहमान’, अब पुलिस ने कसा शिकंजा…NV News

Share this

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में जालसाजी का एक अनोखा और बड़ा मामला प्रकाश में आया है। यहाँ 8 शातिर लोगों ने फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर शिक्षा विभाग में अपनी पैठ बनाई और नियमित कर्मचारियों की तरह सालों तक सरकारी वेतन का लाभ लेते रहे। सिस्टम की नाक के नीचे चल रहे इस खेल का खुलासा तब हुआ जब विभाग ने पुराने रिकॉर्ड्स का मिलान किया। अब कोतवाली पुलिस ने इन सभी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, इन जालसाजों ने कूट रचित (Forged) दस्तावेजों का इस्तेमाल कर खुद को शिक्षा विभाग का कर्मचारी घोषित कर दिया था। सालों तक विभाग के आला अधिकारियों को भी इसकी भनक नहीं लगी कि उनके दफ्तर में काम करने वाले कुछ लोग असल में ‘फर्जी कर्मचारी’ हैं। इन आरोपियों ने न केवल वेतन लिया, बल्कि अन्य सरकारी सुविधाओं का भी फायदा उठाया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगा है।

इस पूरे कांड का भंडाफोड़ विभागीय ऑडिट और दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के दौरान हुआ। जब फाइलों की धूल झाड़ी गई, तो पता चला कि इन 8 लोगों के नाम पर कोई आधिकारिक नियुक्ति आदेश कभी जारी ही नहीं हुआ था। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तत्काल कोतवाली थाने में इनके विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (दस्तावेजों में जालसाजी) और 471 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है जिसने इन फर्जी नियुक्ति पत्रों को तैयार करने और उन्हें विभाग में ‘एंट्री’ दिलाने में मदद की थी। अंदेशा जताया जा रहा है कि विभाग के भीतर के कुछ ‘भेदी’ भी इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं।

जिला प्रशासन अब आरोपियों से उस पूरी रकम की रिकवरी (वसूली) करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है, जो उन्होंने फर्जी तरीके से सालों तक वेतन के रूप में ली है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और वेरिफिकेशन प्रोसेस पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। कलेक्टर ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जल्द से जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।

Share this

You may have missed