राजिम कुंभ 2026: कौतूहल का केंद्र बने 13 वर्षीय बाल नागा साधु, कम उम्र में वैराग्य देख दंग रह गए श्रद्धालु…NV News
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छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम में आयोजित ‘राजिम कुंभ कल्प 2026’ में आस्था के कई रंग देखने को मिल रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच एक 13 वर्षीय बाल नागा साधु श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र बन गए हैं। जहां इस उम्र में बच्चे खेल-कूद और स्कूली शिक्षा में व्यस्त रहते हैं, वहीं इस नन्हें बालक का कठिन वैराग्य और भक्ति मार्ग के प्रति समर्पण देखकर हर कोई हैरान है। त्रिवेणी संगम के पावन तट पर भभूत लपेटे और नागा परंपरा के कठोर नियमों का पालन करते इस बाल साधु की एक झलक पाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
राजिम कुंभ में पहुंचे इस बाल नागा साधु के चेहरे पर तेज और वाणी में संन्यास की गंभीरता साफ झलकती है। उन्हें देखने के लिए न केवल स्थानीय लोग, बल्कि दूर-दराज से आए साधु-संत और विदेशी पर्यटक भी पहुंच रहे हैं। नागा पंथ, जिसे सन्यास मार्ग में सबसे कठिन माना जाता है, उसमें इतनी कम उम्र में प्रवेश करना और उस जीवनशैली को अपनाना कौतूहल का विषय बना हुआ है। श्रद्धालु उनके पास जाकर आशीर्वाद ले रहे हैं और उनके साथ तस्वीरें साझा कर रहे हैं।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, नागा साधु बनने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन होती है और इसमें वर्षों की तपस्या शामिल होती है, लेकिन बचपन से ही इस मार्ग को चुनना ईश्वरीय कृपा और पूर्व जन्मों के संस्कारों का परिणाम माना जाता है। कुंभ मेले के मुख्य पंडालों और नागा अखाड़ों के शिविरों में इस बाल साधु की मौजूदगी ने मेले की दिव्यता को और बढ़ा दिया है। संगम में शाही स्नान के दौरान भी इनकी सक्रियता और अनुशासन चर्चा का विषय बनी रही।
राजिम कुंभ कल्प 2026 अपनी भव्यता के लिए जाना जा रहा है, लेकिन इस बार का यह कुंभ ‘बाल वैराग्य’ की इस अनूठी मिसाल के लिए भी याद रखा जाएगा। सोशल मीडिया पर भी इस नन्हें साधु के वीडियो और फोटो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे लोग राजिम की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। प्रशासन और मेला समिति ने भी श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन के विशेष इंतजाम किए हैं ताकि भक्त सुगमता से दर्शन कर सकें।
