Raipur Plant Accident: सुरक्षा लापरवाही ने छीनी 6 जानें,कई एजेंसियां जांच में जुटीं…NV News 

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Raipur Plant Accident: रायपुर के सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को दहला दिया। गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड के प्लांट में हुए इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्लांट में एक ही समय पर उत्पादन और निर्माण कार्य चल रहा था, जो इस त्रासदी का बड़ा कारण बना। अब कई विभाग और एजेंसियां इस मामले की गहन जांच करेंगी।

कैसे हुआ हादसा:

शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक प्लांट के भीतर तेज धमाका हुआ और लोहे का विशाल ढांचा गिर पड़ा। यह ढांचा तापमान नियंत्रित करने के लिए लगाया गया था। हादसे के वक्त उत्पादन कार्य चल रहा था, वहीं पास में ही दीवार निर्माण का काम भी किया जा रहा था।

कंपनी प्रबंधन ने अचानक मशीनों को थोड़ी देर के लिए बंद कराया और जांच के लिए मैनेजर समेत 10-12 लोग मौके पर पहुंचे। लेकिन इससे पहले कि वे स्थिति को समझ पाते, गरम लोहे का विशाल ढांचा अचानक भरभरा कर गिर गया। कुछ ही सेकंड में पूरे परिसर में चीख-पुकार मच गई। मजदूर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जबकि कई लोग मलबे के नीचे दब गए।

प्लांट में अफरातफरी:

हादसे के बाद प्लांट परिसर का माहौल भयावह हो गया। गेट बंद कर दिए गए ताकि बाहर का कोई व्यक्ति अंदर न आ सके। मीडिया और अन्य बाहरी लोगों को भी रोक दिया गया। यहां तक कि मोबाइल फोन से कोई फोटो या वीडियो बाहर न जा सके, इसके लिए सख्त निगरानी रखी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। एएसपी लखन पटले खुद टीम के साथ अंदर गए और रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली। घायलों को निकालने और शवों को मलबे से बाहर लाने का अभियान लगभग आठ घंटे तक चला।

मजदूरों को चुप रहने का निर्देश:

घटना के बाद क्रांति सेना और स्थानीय संगठन भी मौके पर पहुंच गए। माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्लांट प्रबंधन ने मजदूरों को सख्त हिदायत दी कि वे बाहर किसी से बात न करें। सभी कर्मचारियों को अलग-अलग गेट से बाहर निकाला गया। साथ ही हादसे के तुरंत बाद उत्पादन कार्य को भी बंद कर दिया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन और अस्पताल भेजे गए घायल:

हादसे के लगभग आठ घंटे बाद सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मृतकों के शव पीएम के लिए रवाना किए गए। फिलहाल 6 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है, जबकि घायलों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है।

इन एजेंसियों को सौंपी गई जांच:

• इस हादसे की जांच अब कई एजेंसियां मिलकर करेंगी।

• औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग यह जांच करेगा कि क्या प्लांट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी।

• श्रम विभाग और श्रम आयुक्त मजदूरों की सुरक्षा, कार्यस्थल की स्थितियों और किसी भी तरह की लापरवाही की जांच करेंगे।

• पुलिस विभाग इस पूरे मामले को साजिश के कोण से भी परखेगा और तकनीकी पहलुओं की जांच करेगा।

शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि उत्पादन और निर्माण कार्य का एक साथ चलना गंभीर गलती थी। इससे न केवल कामगारों की जान खतरे में पड़ी, बल्कि पूरे प्लांट की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

अधिकारी का बयान:

एएसपी लखन पटले ने बताया,”घटना की सूचना मिलते ही घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया। फिलहाल छह मौतों की पुष्टि हुई है। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ीं:

हादसे के बाद गोदावरी पावर एंड इस्पात प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में यह पहला मौका नहीं है जब सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण जानमाल का नुकसान हुआ हो। स्थानीय संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

भविष्य के लिए सबक:

यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर करता है। यदि समय पर उचित सुरक्षा प्रबंध किए गए होते और उत्पादन व निर्माण कार्य अलग-अलग समय पर संचालित किए जाते, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी।

रायपुर का यह दर्दनाक हादसा न केवल 6 परिवारों को उजाड़ गया, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर गया है। जांच एजेंसियों के निष्कर्ष और आने वाली कार्रवाइयां यह तय करेंगी कि दोषियों को कितनी सख्त सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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