Private Universities: निजी विश्वविद्यालयों पर गंभीर आरोप; छत्तीसगढ़ में स्वतंत्र राज्य-स्तरीय लोकपाल की नियुक्ति की मांग

Share this

रायपुर। छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार से निजी विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश स्तर पर एक स्वतंत्र “छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय लोकपाल” की नियुक्ति की मांग की है।

 

संजय सिंह ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि यह लोकपाल केवल सलाह देने वाला न होकर दंडात्मक अधिकारों से लैस होना चाहिए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है। नियमों के तहत हर निजी विश्वविद्यालय में लोकपाल की नियुक्ति अनिवार्य है, लेकिन चूंकि इन लोकपालों की नियुक्ति स्वयं विश्वविद्यालय प्रबंधन करता है, इसलिए वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप गंभीर शिकायतें भी दबा दी जाती हैं और छात्रों को न्याय नहीं मिल पाता।

 

क्यों जरूरी है प्रदेश स्तरीय लोकपाल

ठाकुर ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है और राज्य सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग में सचिव पद पर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अशोक अग्रवाल की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए।

उनका कहना है कि एक ऐसा अधिकारी, जो पहले हाईकोर्ट जज के समकक्ष पद पर सूचना आयुक्त रह चुका हो, उसे प्रोफेसर या डिप्टी कलेक्टर स्तर के पद पर नियुक्त करना कई संदेह पैदा करता है। उन्होंने इसे संभावित पदावनति (डिमोशन) करार देते हुए कहा कि ऐसे “अनुग्रहित” अधिकारी से निजी विश्वविद्यालयों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

 

डिग्रियों की गुणवत्ता पर सवाल

संजय सिंह ठाकुर ने निजी विश्वविद्यालयों द्वारा जारी की जा रही डिग्रियों और उपाधियों की गहन जांच की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि डिग्रियां वास्तव में पढ़ाई के आधार पर दी जा रही हैं या पैसों के दम पर बेची जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी निष्पक्ष और कठोर जांच केवल एक स्वतंत्र और अधिकार संपन्न प्रदेश स्तरीय लोकपाल ही कर सकता है, न कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा नियुक्त आंतरिक लोकपाल।

ठाकुर ने राज्य सरकार से अपील की कि शिक्षा को व्यवसाय बनने से बचाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तरीय लोकपाल की नियुक्ति से न केवल निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी पर रोक लगेगी, बल्कि छात्रों के भविष्य की भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

 

Share this

You may have missed