छत्तीसगढ़ में ‘सियासी फाग’: भूपेश बघेल ने गीत गाकर सरकार को घेरा—”मुसवा बिन घोटाला ना होए”; BJP का तीखा पलटवार—”पकड़ागे, धरागे मुसवा मन रे”…NV News

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छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों फाल्गुन की मस्ती के साथ-साथ तीखे राजनीतिक कटाक्षों का दौर जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ी फाग गीत की धुनों पर राज्य की विष्णु देव साय सरकार पर तंज कसा। उन्होंने गीत के बोलों में ‘मुसवा’ (चूहा) शब्द का प्रयोग करते हुए कहा— “मुसवा बिन घोटाला ना होए विष्णु…”। बघेल का इशारा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढिलाई की ओर था। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है।

भूपेश बघेल के इस संगीतमय हमले पर भारतीय जनता पार्टी ने भी उसी अंदाज में पलटवार करने में देर नहीं की। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और सोशल मीडिया सेल ने जवाबी फाग गीत जारी करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोयला, शराब और महादेव ऐप जैसे कथित घोटालों की याद दिलाई। भाजपा ने पलटवार करते हुए गाया— “पकड़ागे, धरागे, मुसवा मन रे…”। भाजपा का कहना है कि जो लोग खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हैं और जिनकी जांच एजेंसियां घेराबंदी कर रही हैं, उन्हें दूसरों पर उंगली उठाने का हक नहीं है।

इस ‘फाग युद्ध’ ने सोशल मीडिया पर नेटिजन्स का खूब ध्यान खींचा है। जहां कांग्रेस समर्थक भूपेश बघेल के अंदाज को जनता की आवाज बता रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक इसे बघेल की खीझ करार दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में लोक संस्कृति और गीतों का राजनीति में गहरा प्रभाव रहता है, और होली के करीब आते ही इस तरह की हास्य-व्यंग्य वाली बयानबाजी जनता के बीच पैठ बनाने का एक प्रभावी तरीका बन गई है।

यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ में ‘मुसवा’ शब्द राजनीतिक चर्चा का विषय बना है। इससे पहले भी विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर इस शब्द को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही है। फिलहाल, फाल्गुन की इस सियासी फाग ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर और भी रोचक होने वाला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी मुस्कुराते हुए इस पर प्रतिक्रिया दी कि विपक्ष का काम बोलना है, लेकिन जनता हकीकत जानती है।

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