POCSO केस में बड़ी राहत: बिलासपुर हाईकोर्ट ने उम्रकैद पाए आरोपी को किया बरी
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बिलासपुर। पॉक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा काट रहे एक आरोपी को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने पहचान परेड और जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई जाने के बाद आरोपी प्रसेन कुमार भार्गव को बरी कर दिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि—“अपराध घटित होना सिद्ध है, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि अपराध अपीलकर्ता ने ही किया है।”
मामला क्या था?
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार निवासी प्रसेन कुमार भार्गव को 8 जुलाई 2022 को विशेष न्यायालय (POCSO) ने दोषी ठहराया था।
अभियोजन के अनुसार:
- घटना 26 सितंबर 2019 की रात की है।
- 11 वर्षीय नाबालिग लड़की को घर से सोते समय कथित रूप से उठा लिया गया था।
- पीड़िता का आरोप था कि उसे कैप्सूल-नुमा वाहन में ले जाकर दुष्कर्म किया गया।
- पहचान परेड के दौरान पीड़िता ने आरोपी की पहचान की थी।
- पुलिस ने आरोपी का एक वाहन भी जब्त किया था।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में रेप साबित, पर अपराधी की पहचान नहीं:-
कोर्ट ने कहा:
मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म होना प्रमाणित है,
लेकिन मेडिकल रिपोर्ट किसी व्यक्ति को अपराध से जोड़ नहीं सकती।
कोर्ट ने इस आधार पर आरोपी से अपराध को जोड़ने वाली कड़ी को कमजोर माना।
पहचान परेड पर हाईकोर्ट की कठोर टिप्पणी:-
- हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया को गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण बताया
- पीड़िता और गवाहों को परेड से पहले ही थाने में आरोपी दिखा दिया गया था।
- पहचान परेड जेल में करने के बजाय सिंचाई विभाग के रेस्ट हाउस में कराई गई—जो नियमों का उल्लंघन है।
- इससे पूरी प्रक्रिया की साक्ष्य-विश्वसनीयता खत्म हो जाती है।
पीड़िता और परिजनों के बयान में विरोधाभास:-
कोर्ट ने पाया:
- घटना के समय वाहन के रंग और डिजाइन
- कथित कैप्सूल कार तथा पुलिस द्वारा जब्त वाहन में भारी विरोधाभास थे।
- निचली अदालत ने इन खामियों और बचाव पक्ष की दलीलों को नजरअंदाज करते हुए अनुमान के आधार पर दोषसिद्धि का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट का फैसला:-
खंडपीठ ने कहा— “अभियोजन आरोपी को अपराध से जोड़ने वाले पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा।”
इस आधार पर हाईकोर्ट ने:
8 जुलाई 2022 का दोषसिद्धि आदेश रद्द किया
आरोपी प्रसेन कुमार भार्गव को सभी आरोपों से बरी कर दिया
