14वें मंत्री की नियुक्ति पर दायर याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने कहा – को-वारंटो नहीं, नई जनहित याचिका दायर करें

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान 14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। राज्य सरकार द्वारा संवैधानिक बाध्यताओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने को-वारंटो याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने सुनवाई योग्य मानने से इंकार कर दिया।

 

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता को सलाह देते हुए कहा कि इस मामले में को-वारंटो याचिका का स्वरूप उपयुक्त नहीं है। यदि वे इस मुद्दे पर हस्तक्षेप चाहते हैं, तो उन्हें नई जनहित याचिका (PIL) दायर करनी होगी।

 

उल्लेखनीय है कि राज्य में 14वें मंत्री की नियुक्ति को पहले ही रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता वासु चक्रवर्ती ने जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। इसके बाद इसी विषय पर दूसरी जनहित याचिका भी दायर की गई, जिन्हें हाई कोर्ट पहले ही मर्ज कर चुका है। दोनों पीआईएल पर संयुक्त रूप से सुनवाई जारी है।

 

इसी बीच, कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने एक अतिरिक्त याचिका के रूप में को-वारंटो याचिका दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस मुद्दे पर पहले से लंबित पीआईएल ही पर्याप्त हैं और नई सुनवाई केवल जनहित याचिका के माध्यम से ही हो सकती है।

 

राज्य की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर छिड़ी बहस के बीच हाई कोर्ट का यह निर्णय एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब मामला मौजूदा दो पीआईएल के साथ ही आगे बढ़ेगा।

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