छत्तीसगढ़ में खनन माफियाओं की खैर नहीं: ड्रोन से होगी 24×7 निगरानी, अवैध उत्खनन पर ‘आसमानी’ नजर…NV News
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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने अवैध उत्खनन के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाते हुए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। राज्य के खनिज साधन विभाग ने अब रेत, बजरी और अन्य गौण खनिजों की खदानों की निगरानी के लिए ड्रोन सर्विलांस प्रणाली को मंजूरी दी है। यह कदम विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उठाया गया है जहाँ मैन्युअल निगरानी कठिन होती है और माफिया रात के अंधेरे का फायदा उठाकर अवैध निकासी करते हैं।
ड्रोन निगरानी प्रणाली की मुख्य विशेषताएं:
24×7 रियल-टाइम मॉनिटरिंग: ड्रोन के जरिए दिन और रात (नाइट विजन कैमरों के साथ) खदानों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। इससे अवैध उत्खनन और परिवहन की तुरंत जानकारी कंट्रोल रूम को मिल सकेगी।
वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस (मात्रा का आकलन): ड्रोन तकनीक की मदद से यह सटीक पता लगाया जा सकेगा कि स्वीकृत पट्टे (Lease) से कितनी मात्रा में खनिज निकाला गया है और क्या स्वीकृत सीमा के बाहर खुदाई की गई है।
अवैध रास्तों की पहचान: माफिया अक्सर मुख्य मार्गों के बजाय अवैध रास्तों का उपयोग करते हैं। ड्रोन इन गुप्त रास्तों और वहां छिपाई गई मशीनों (JCB, पोकलेन) की पहचान आसानी से कर लेगा।
राजस्व में वृद्धि: निगरानी सख्त होने से रॉयल्टी की चोरी रुकेगी। अनुमान है कि इससे राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व में सालाना 10% से 15% की वृद्धि हो सकती है।
सुरक्षा और डेटा: ड्रोन से प्राप्त डेटा को क्लाउड पर सुरक्षित रखा जाएगा, जिसे साक्ष्य (Evidence) के तौर पर अदालती कार्रवाई में उपयोग किया जा सकेगा।
इन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस:
सरकार का प्राथमिक ध्यान रायपुर, बिलासपुर, धमतरी, और गरियाबंद जैसे जिलों पर है, जहाँ खारून और महानदी के तटों पर रेत के अवैध उत्खनन की शिकायतें सबसे अधिक आती हैं। इसके लिए ‘राज्य खनिज अन्वेषण न्यास’ का गठन भी किया गया है, जो इस पूरी निगरानी प्रक्रिया का प्रबंधन करेगा।
