जमीन नहीं फिर भी 25 लाख का मुआवजा तैयार! CGPSC आरोपी के बेटे के नाम पर बड़ा खेल, क्या है बाक्साइट खदान का ‘मुआवजा कांड’?…NV News
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अंबिकापुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट में बॉक्साइट खदान के लिए दिए जाने वाले मुआवजे में एक बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। इस पूरे घोटाले के तार प्रदेश के बहुचर्चित CGPSC घोटाले के आरोपियों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा खुलासे के अनुसार, कागजों पर जमीन न होने के बावजूद भारी-भरकम मुआवजा राशि स्वीकृत कर दी गई है।
CGPSC आरोपी के बेटे को ‘मुआवजा’
दस्तावेजों से पता चला है कि CGPSC घोटाले के एक मुख्य आरोपित के बेटे के नाम पर लगभग 25 लाख रुपये का मुआवजा तैयार किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस खसरा नंबर या जमीन के आधार पर यह राशि स्वीकृत की गई है, वह धरातल पर संबंधित व्यक्ति के नाम है ही नहीं। यह पूरा मामला मैनपाट क्षेत्र में संचालित बाक्साइट खदानों के लिए किए जा रहे भू-अर्जन से जुड़ा हुआ है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
जांच में यह संकेत मिले हैं कि राजस्व विभाग के अधिकारियों और खदान प्रबंधन की मिलीभगत से निजी और सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। रसूखदार लोगों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर कागजी जमीन दिखाकर मुआवजे की फाइल तैयार करवा ली। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिनकी वास्तव में जमीनें खदान में गई हैं, वे दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि ‘बड़े नामों’ को घर बैठे लाखों रुपये बाँटे जा रहे हैं।
जांच के घेरे में अधिकारी
इस खुलासे के बाद सरगुजा जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब भू-अर्जन की पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या CGPSC घोटाले की काली कमाई को सफेद करने के लिए मैनपाट की खदानों को जरिया बनाया जा रहा था?
