रेत माफियाओं पर NGT का ‘हंटर’: रायपुर में अवैध उत्खनन पर अधिकारियों की भूमिका की होगी जांच, 42 दिन में मांगी रिपोर्ट; भ्रष्टाचार की खुलेगी परतें…NV News
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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और इसके सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे अवैध रेत खनन के खेल पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा प्रहार किया है। एनजीटी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि बिना सरकारी संरक्षण के इतना बड़ा अवैध कारोबार मुमकिन नहीं है। ट्रिब्यूनल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 42 दिनों के भीतर एक उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इस निर्देश के बाद खनिज विभाग और राजस्व विभाग के उन अधिकारियों में हड़कंप मच गया है, जिनकी नाक के नीचे रेत माफिया नदियों का अस्तित्व खत्म कर रहे थे।
न्यायमूर्ति की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अवैध खनन न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहा है, बल्कि शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना भी लगा रहा है। एनजीटी ने एक विशेष समिति का गठन करने का निर्देश दिया है, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह टीम इस बात की जांच करेगी कि प्रतिबंधित क्षेत्रों और मशीनों के उपयोग की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई या क्यों नजरअंदाज की गई।
NGT की सख्ती और संभावित कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
अधिकारियों की जवाबदेही: ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी की मिलीभगत पाई गई, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ भारी पर्यावरणीय जुर्माना (Environmental Compensation) भी लगाया जाएगा।
मशीनीकृत खनन पर रोक: रायपुर के पास खारून और महानदी की सहायक नदियों में भारी मशीनों (JCB, Poclain) के उपयोग की शिकायतों पर एनजीटी ने कड़ी नाराजगी जताई है।
42 दिन का अल्टीमेटम: प्रशासन को अगले 6 हफ्तों के भीतर की गई कार्रवाई, जब्त वाहनों और अवैध स्टॉक की विस्तृत जानकारी फोटो और वीडियो साक्ष्यों के साथ जमा करनी होगी।
पर्यावरण को क्षति: रिपोर्ट में यह भी शामिल करना होगा कि अवैध खनन के कारण नदियों के जलस्तर और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर कितना प्रभाव पड़ा है।
इस आदेश के बाद रायपुर कलेक्टर और खनिज अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में छापेमारी तेज कर दी है। जानकारों का मानना है कि एनजीटी की यह सख्ती रायपुर में रेत सिंडिकेट की कमर तोड़ सकती है। यदि रिपोर्ट में अधिकारियों की संलिप्तता के ठोस सबूत मिलते हैं, तो कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय है।
