तेंदुए का खौफ; 6 दिनों में 4 ग्रामीणों पर हमला, शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर लोग…NV News

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NV News कांकेर: छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य कांकेर जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों तेंदुए का खौफनाक आतंक देखने को मिल रहा है। जंगली क्षेत्र से निकलकर रिहायशी इलाकों में दाखिल हो रहे तेंदुए ने ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन पूरी तरह उड़ा दिया है। बीते महज 6 दिनों के भीतर तेंदुए ने अलग-अलग गांवों में चार लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया है। इस लगातार हो रहे हमलों के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और वन विभाग की टीम को हाई अलर्ट मोड पर रख दिया गया है। लल्लूराम डॉट कॉम की विशेष टीम ने उस प्रभावित गांव का दौरा किया, जहां तेंदुए की दहशत ने लोगों की सामान्य जिंदगी को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेंदुए के हिंसक हमले की ये घटनाएं मुख्य रूप से जिले के दो अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं। इनमें से तीन सिलसिलेवार हमले दुधावा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम गट्टागुडुम में हुए हैं, जबकि चौथी घटना नरहरपुर क्षेत्र के ग्राम देवडोंगर में सामने आई है। तेंदुआ अचानक जंगलों से निकलकर खेतों या बस्तियों के करीब आ जाता है और अकेले पाकर ग्रामीणों पर झपट्टा मार रहा है। खुनी संघर्ष में घायल हुए चारों ग्रामीणों को स्थानीय अस्पतालों में दाखिल कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। इस अचानक बढ़े संकट ने ग्रामीणों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है।

हालात इस कदर चिंताजनक हो चुके हैं कि प्रभावित गांवों में सूरज ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। शाम होते ही ग्रामीण अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर बांधकर खुद को घरों के भीतर कैद करने को मजबूर हैं। कोई भी व्यक्ति रात के समय अकेले बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है, जिन्हें माता-पिता ने अकेले घर से बाहर या स्कूल भेजने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तेंदुए को पकड़ा नहीं जाता, तब तक वे चैन की सांस नहीं ले पाएंगे क्योंकि उनकी जान पर लगातार खतरा मंडरा रहा है।

इधर, क्षेत्र में बढ़ते जनआक्रोश और गंभीर स्थिति को देखते हुए वन विभाग का अमला पूरी तरह अलर्ट हो गया है। वन अधिकारियों ने प्रभावित गांवों में गश्त (पेट्रोलिंग) बढ़ा दी है और ग्रामीणों को रात के समय समूह में रहने तथा मशाल या टॉर्च का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। तेंदुए की लोकेशन ट्रेस करने के लिए संभावित जंगलों और रास्तों पर ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं, साथ ही उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी वन्यजीव को खुद नुकसान न पहुंचाएं और तेंदुए के दिखने पर तुरंत इसकी सूचना नजदीकी वन चौकी को दें।

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