मच्छरों का नया ‘माइंड गेम’: रिपेलेंट स्प्रे की महक से डरने के बजाय अब इंसानों के और करीब आ रहे स्मार्ट मच्छर, नई रिसर्च में दावा…NV News
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NV News- Raipur गर्मियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही मच्छरों का आतंक तेजी से बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए दुनिया भर में मॉस्किटो रिपेलेंट स्प्रे और क्रीम का इस्तेमाल सबसे भरोसेमंद हथियार के रूप में किया जाता है। हालांकि, ‘जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी’ में प्रकाशित वैज्ञानिकों की एक नई और बेहद चौंकाने वाली रिसर्च ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस शोध के मुताबिक, खून चूसने वाले ये खतरनाक मच्छर अब समय के साथ बेहद ‘स्मार्ट’ होते जा रहे हैं और वे अब रिपेलेंट स्प्रे की गंध से डरकर दूर भागने के बजाय इंसानों की तरफ और तेजी से आकर्षित होने लगे हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मॉस्किटो रिपेलेंट में ‘DEET’ नामक एक विशेष केमिकल का प्रयोग किया जाता है, जिसे मच्छरों के खिलाफ सबसे अचूक माना जाता है। लेकिन जैसे मशहूर वैज्ञानिक पावलॉव के कुत्ते ने घंटी की आवाज को भोजन से जोड़ना सीख लिया था, ठीक उसी तरह इन मच्छरों के दिमाग ने भी इस रिपेलेंट स्प्रे की तीखी गंध को ‘भोजन (इंसानी खून)’ के संकेत के रूप में समझना शुरू कर दिया है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान जिन मच्छरों को रिपेलेंट की मौजूदगी में भोजन दिया गया था, उनमें से 60 प्रतिशत से अधिक मच्छरों ने बाद में केवल रिपेलेंट की गंध सूंघकर ही काटने का प्रयास किया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, मच्छरों से फैलने वाले डेंगू, मलेरिया, जीका और चिकनगुनिया जैसे जानलेवा रोगों के कारण हर साल दुनिया भर में करीब 7 लाख लोगों की जान चली जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मच्छरों के व्यवहार में आया यह बदलाव एक बड़े ‘पैराडाइम शिफ्ट’ (सोच में बदलाव) को दर्शाता है, जो यह साबित करता है कि मच्छरों का दिमाग रसायनों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को पिछले अनुभवों के आधार पर पूरी तरह बदल या ‘रीराइट’ कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यह प्रयोग बेहद विशिष्ट प्रयोगशाला परिस्थितियों में हुआ है, इसलिए आम लोगों को अभी भी अपनी सुरक्षा के लिए रिपेलेंट स्प्रे का इस्तेमाल जारी रखना चाहिए।

