मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन का पक्ष: ‘बिजली का करंट’ और उद्योग का संकट…NV News
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Raipur: छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने जनसुनवाई के दौरान यह तर्क दिया कि स्टील उद्योग पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। एक टन लोहा गलाने में लगभग 1,300 यूनिट बिजली की खपत होती है। दरों में वृद्धि के कारण उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है, जिससे छत्तीसगढ़ का स्टील अब पड़ोसी राज्यों (जैसे ओडिशा और महाराष्ट्र) के मुकाबले बाजार में महंगा और अप्रतिस्पर्धी हो गया है। एसोसिएशन का दावा है कि यदि दरों में कमी नहीं की गई, तो प्रदेश के लगभग 200 मिनी स्टील प्लांट स्थायी रूप से बंद हो सकते हैं, जिससे 2 से 3 लाख श्रमिकों के रोजगार पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें (Major Demands)
एसोसिएशन ने राज्य सरकार और विद्युत नियामक आयोग के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
एनर्जी चार्ज में सब्सिडी: अगले 5 वर्षों के लिए बिजली दरों में ₹1.40 प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जाए।
विद्युत शुल्क (Electricity Duty) में छूट: वर्तमान में लागू 8% विद्युत शुल्क को अगले 15 वर्षों के लिए शून्य (Exempted) किया जाए।
लोड फैक्टर छूट में सुधार: लोड फैक्टर पर मिलने वाली छूट को पुरानी व्यवस्था (25% तक) के अनुसार बहाल किया जाए, जिसे घटाकर कम कर दिया गया था।
FPPAS और अन्य अधिभार: फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) और अन्य उपकरों (Cess) के बोझ को कम किया जाए, जो बिल को 10-15% तक बढ़ा देते हैं।
क्रॉस सब्सिडी का बोझ कम हो: औद्योगिक उपभोक्ताओं पर घरेलू उपभोक्ताओं की क्रॉस सब्सिडी का अत्यधिक भार न डाला जाए।
