Mineral Transport Railway: रेल बनेगी विकास की राह या संसाधन निकासी का रास्ता? जनता में गहराता संदेह

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जगदलपुर। Mineral Transport Railway, जगदलपुर–रावघाट रेल लाइन को लेकर बस्तर अंचल में असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। वर्षों पहले हजारों करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक ज़मीनी स्तर पर काम शुरू न होना स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जिस रेल परियोजना को क्षेत्रीय विकास की रीढ़ माना जा रहा था, वह अब केवल कागजों तक सिमटती नजर आ रही है।

यात्री सुविधा नहीं, खनिज ढुलाई का मार्ग बनने की आशंका

Bastar Rail Project, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि नई रेल लाइन का उद्देश्य आम यात्रियों की सुविधा के बजाय खनिज परिवहन तक सीमित रह सकता है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में यह लाइन केवल लौह अयस्क ढुलाई का कॉरिडोर बनकर रह जाएगी, जिससे बस्तर को अपेक्षित सामाजिक और आर्थिक लाभ नहीं मिल पाएगा।

पुरानी रेल लाइन को पुनर्जीवित करने की मांग तेज

Bastar Rail Project, इसी बीच रायपुर–धमतरी–कोंडागांव की पुरानी रेल लाइन को दोबारा महत्व देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। नागरिकों का तर्क है कि यह मार्ग अपेक्षाकृत किफायती, यात्री अनुकूल और बस्तर के गांवों-कस्बों को सीधे जोड़ने में अधिक सक्षम साबित हो सकता है।

दोहरीकरण के बिना नई ट्रेनों की उम्मीदें धूमिल

Bastar Rail Project, रेल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा ट्रैक का दोहरीकरण किए बिना नई यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं लगभग शून्य हैं। इससे न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से भी कटे रह जा रहे हैं।

समग्र रेल नेटवर्क की जरूरत पर जोर

Bastar Rail Project, स्थानीय लोगों का कहना है कि बस्तर को सिर्फ एक औद्योगिक परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि गांवों और कस्बों को जोड़ने वाला समग्र रेल नेटवर्क चाहिए। उनका मानना है कि रेल परियोजनाएं अगर जनहित आधारित होंगी, तभी क्षेत्र का वास्तविक विकास संभव होगा।

रेल बजट से जगी नई उम्मीदें

Bastar Rail Project, आगामी रेल बजट को लेकर बस्तरवासियों को उम्मीद है कि सरकार पुनः सर्वे, विस्तार और यात्री केंद्रित योजनाओं पर गंभीरता से विचार करेगी। लोगों की मांग है कि रेल परियोजनाओं को केवल उद्योगों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन से जोड़ा जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या रेल बस्तर के विकास का माध्यम बनेगी, या बस्तर से सिर्फ संसाधन निकालने का रास्ता?

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