MGNREGA controversy: मनरेगा का नाम बदलने के प्रस्ताव पर कांग्रेस का तीखा विरोध, इतने महीने तक चलेगा ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’
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MGNREGA controversy, रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम में बदलाव के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस ने इसे ऐतिहासिक योजना और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विचारधारा पर सीधा हमला बताते हुए प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि “मनरेगा बचाओ संग्राम” के बैनर तले जनवरी से फरवरी 2026 तक लगातार विरोध प्रदर्शन और जनआंदोलन किए जाएंगे।
MGNREGA controversy, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार, सम्मान और संवैधानिक अधिकार की गारंटी है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार योजनाओं से महात्मा गांधी का नाम और उनके मूल्यों को हटाने की राजनीति कर रही है। कांग्रेस के अनुसार, मनरेगा का नाम बदलना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि इससे योजना की आत्मा और उसके सामाजिक उद्देश्य को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
MGNREGA controversy, चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर गांव से लेकर विधानसभा और राष्ट्रीय स्तर तक आंदोलन चलाने का रोडमैप तैयार किया है।
10 जनवरी 2026:
सभी जिलों में जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें मनरेगा के महत्व और नाम बदलने के संभावित दुष्परिणामों को उजागर किया जाएगा।
11 जनवरी 2026:
एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
12 जनवरी से 29 जनवरी 2026:
पंचायत स्तर पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर ग्रामीणों से संवाद और जनसमर्थन जुटाया जाएगा।
30 जनवरी 2026:
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया जाएगा।
31 जनवरी से 6 फरवरी 2026:
जिला स्तरीय “मनरेगा बचाओ धरना” आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूरों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।
7 फरवरी से 15 फरवरी 2026:
राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव कार्यक्रम प्रस्तावित है।
16 फरवरी से 25 फरवरी 2026:
क्षेत्रीय स्तर पर एआईसीसी रैलियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय नेताओं की भागीदारी भी हो सकती है।
MGNREGA controversy, ग्रामीण रोजगार पर असर का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और संकट के समय रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्टी का दावा है कि योजना का नाम बदलने से इसकी पहचान कमजोर होगी और जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
