PM आवास योजना की बड़ी गड़बड़ी: 13 गरीब परिवार कंप्यूटर की गलती के शिकार, न पैसा मिला न मकान!

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राजिम। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का लाभ पाने की उम्मीद में कोपरा नगर पंचायत के 13 गरीब परिवार आज भी पक्के घर का सपना लिए भटक रहे हैं। सिस्टम की लापरवाही और पोर्टल की त्रुटि ने इन परिवारों को सड़क, सरकार और योजनाओं—तीनों से बाहर कर दिया है।

 

जानकारी के अनुसार, इन 13 परिवारों ने PMAY-Urban 2.0 के तहत आवेदन किया था, लेकिन जब पोर्टल की जांच की गई तो इनके नाम पहले से PMAY-Gramin के लाभार्थी के रूप में दर्ज पाए गए। समस्या यह है कि इन परिवारों को न तो ग्रामीण आवास योजना का कोई पैसा मिला, न मकान स्वीकृत हुआ और न ही कोई अधिकारी इनके घर तक सत्यापन के लिए पहुंचा।

 

एक बुजुर्ग हितग्राही ने भावुक होकर कहा—

“बाबू लोग कहते हैं कंप्यूटर में आपका मकान बन चुका है। हम कहते हैं दिखाओ कहाँ है, तो चुप हो जाते हैं। झोपड़ी टपक रही है, पर नया मकान पाने का रास्ता बंद कर दिया गया है।”

 

मामले के तूल पकड़ने के बाद कोपरा नगर पंचायत ने जनपद पंचायत फ़िंगेश्वर को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि इन 13 हितग्राहियों के नाम या तो ग्रामीण पोर्टल से हटाए जाएं या यह लिखित में बताया जाए कि इन्हें ग्रामीण योजना का लाभ मिल चुका है। लेकिन महीनों बीत चुके हैं और अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

 

स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं—आखिर गलती किसकी है?

क्या ग्रामीण विभाग ने बिना सत्यापन के नाम चढ़ा दिए?

क्या शहरी विभाग ने क्रॉस-चेक नहीं किया?

या फिर यह डिजिटल इंडिया की वह खामी है, जहाँ गरीब कंप्यूटर की गलत एंट्री का शिकार बन गया है?

 

वर्तमान में ये 13 परिवार अपनी फरियाद लेकर जिला कलेक्टर गरियाबंद के समक्ष शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं। जनता की मांग है—या तो पक्का मकान मिले, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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