“Mahadev App Case”: सौरभ-रवि को झटका, ईडी ने कसा शिकंजा…NV News

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Raipur (CG): महादेव सट्टा एप मामले में मुख्य आरोपी और एप संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दोनों को गिरफ्तारी से राहत नहीं मिली है। शनिवार को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की विशेष अदालत में गैर-जमानती वारंट रद्द करने की उनकी अर्जी पर सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो अब 3 नवंबर को सुनाया जाएगा।
कोर्ट में पेश होने का वादा, लेकिन राहत नहीं:
सौरभ और रवि की ओर से वकीलों ने दलील दी कि उनके मुवक्किल तीन महीने के भीतर कोर्ट में पेश हो जाएंगे, इसलिए वारंट रद्द किया जाए। हालांकि, ईडी ने इस मांग का कड़ा विरोध किया। ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने कहा कि आरोपी जांच में लगातार सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्हें कई बार समन भेजे गए, लेकिन वे पेश नहीं हुए। हाईकोर्ट ने भी पहले उनकी याचिका खारिज की थी।
ईडी का कहना है कि अगर आरोपी बिना शर्त पेश होने की बात करते, तो वारंट पर विचार संभव था। लेकिन उन्होंने फिर से समय बढ़ाने की शर्त रखी, जिससे उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाना जरूरी हो गया।
ऑनलाइन सट्टेबाजी से अरबों की कमाई:
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने साल 2019 में महादेव सट्टा एप की शुरुआत की थी। शुरुआत में यह एप क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस जैसे खेलों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित था। बाद में इसमें पोकर, तीन पत्ती, वर्चुअल गेम और यहां तक कि चुनावों पर भी दांव लगाए जाने लगे। देखते ही देखते यह एप अवैध जुआ गतिविधियों का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया।
ईडी की जांच के अनुसार, इस एप के जरिए हर महीने लगभग 450 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की जा रही थी। लॉकडाउन के बाद इसकी कमाई में और तेजी आई। अनुमान है कि महादेव सट्टा एप के नेटवर्क से 4,000 से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं और देशभर में करीब 4,000 ब्रांच आज भी संचालित हो रही हैं।
कार्रवाई में तेजी, रेड कॉर्नर नोटिस जारी:
संसद में ऑनलाइन गेमिंग और जुआ पर नियंत्रण के लिए बिल पारित होने के बाद इस मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। ईडी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के साथ इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर दिया है। इसके अलावा, प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है, जिससे दोनों को भारत लाया जा सके।फिलहाल सौरभ और रवि दुबई में हैं और वहां से बाहर नहीं जा सकते। उनके खिलाफ ईडी के अलावा सीबीआई और विभिन्न राज्यों की पुलिस भी जांच कर रही है।
3,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां:
पिछले तीन सालों में महादेव एप से जुड़े नेटवर्क पर कई राज्यों में छापेमारी हुई है। अब तक 3,000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें कई बड़े एजेंट और ऑपरेटर शामिल हैं।
अगला कदम:
अगर कोर्ट तीन नवंबर को वारंट रद्द नहीं करता, तो दोनों के खिलाफ कार्रवाई और तेज हो जाएगी। ईडी पहले ही संकेत दे चुकी है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर आरोपियों को भारत लाने की कोशिश करेंगे।
महादेव सट्टा एप मामला सिर्फ ऑनलाइन सट्टेबाजी नहीं, बल्कि संगठित वित्तीय अपराध का बड़ा उदाहरण बन चुका है। इसमें करोड़ों नहीं, बल्कि हजारों करोड़ का खेल है। कोर्ट का आने वाला फैसला और प्रत्यर्पण प्रक्रिया इस केस की दिशा तय करेंगे।