कोरबा का ‘सुपरफूड’ मॉडल: अब स्कूलों में महुआ लड्डू से मिटेगा कुपोषण, 2.50 लाख बच्चों की थाली में पहुँचेगी वनांचल की मिठास…NV News
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छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला अब बच्चों के पोषण के मामले में पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल पेश करने जा रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर जिले के प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के लगभग 2.50 लाख स्कूली बच्चों के मिड-डे मील (मध्यान्ह भोजन) के मेनू में ‘महुआ लड्डू’ को शामिल किया गया है। यह फैसला न केवल बच्चों में कुपोषण की छुट्टी करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को आधुनिक पोषण का हिस्सा भी बनाएगा।
क्यों खास है महुआ लड्डू?
आमतौर पर लोग महुआ को सिर्फ शराब के चश्मे से देखते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि महुआ का फूल प्राकृतिक पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस और कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। बढ़ते बच्चों के लिए यह किसी ‘एनर्जी बार’ से कम नहीं है। विशेष रूप से जिले की छात्राओं में एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने में यह रामबाण साबित होगा।
महिला स्व-सहायता समूहों को बड़ी जिम्मेदारी:
इस योजना का सबसे मजबूत पहलू इसका आर्थिक चक्र है। इन लाखों लड्डुओं को तैयार करने का जिम्मा कोरबा जिले की ग्रामीण महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है। महुआ संग्रहण करने वाले आदिवासियों को उनके फल की अच्छी कीमत मिलेगी और महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार। लड्डू बनाने में महुआ के साथ मूंगफली और गुड़ का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे इसकी पौष्टिकता और स्वाद दोनों बढ़ गए हैं।
प्रशासन की निगरानी:
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महुआ लड्डू की गुणवत्ता और हाइजीन के साथ कोई समझौता नहीं होगा। इसके लिए फूड क्वालिटी चेक की एक टीम बनाई गई है। बच्चों को यह लड्डू सप्ताह में निर्धारित दिनों पर दिया जाएगा। शुरुआती फीडबैक में बच्चों ने महुआ लड्डू के स्वाद को काफी पसंद किया है, जिससे स्कूलों में उपस्थिति बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
कोरबा जिले की यह पहल ‘लोकल फॉर वोकल’ का सबसे सटीक उदाहरण है, जहाँ स्थानीय संसाधनों का उपयोग स्थानीय समस्याओं (जैसे कुपोषण) के समाधान के लिए किया जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे पूरे छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है।
लाभार्थी: जिले के लगभग 2.50 लाख स्कूली बच्चे।
मुख्य उद्देश्य: कुपोषण दूर करना और इम्यूनिटी बढ़ाना।
बोनस: ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का नया जरिया।
पोषक तत्व: आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स की प्रचुरता।
