भारत की ऊर्जा सुरक्षा: संकट के बीच कुवैत ने निभाई दोस्ती, 4 टैंकरों में भेजा लाखों बैरल कच्चा तेल…NV News
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मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में मुस्लिम राष्ट्र कुवैत ने भारत के साथ अपनी गहरी दोस्ती का परिचय दिया है। कुवैत ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए चार विशाल टैंकरों में भरकर लाखों बैरल कच्चा तेल (Crude Oil) भेजा है। इस कदम से भारत के रणनीतिक तेल भंडार को मजबूती मिलेगी और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार मार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा था। ऐसी स्थिति में कुवैत द्वारा प्राथमिकता के आधार पर भारत को तेल की खेप भेजना यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध कितने मजबूत हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है, और इस तरह की समयबद्ध मदद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
कुवैत से आए इस तेल की खेप का सीधा लाभ भारत की आम जनता को मिलने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, इस सुरक्षित आपूर्ति से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा। केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियां इस आपूर्ति के माध्यम से आगामी महीनों के लिए बफर स्टॉक तैयार कर रही हैं, ताकि युद्ध की स्थिति लंबी खिंचने पर भी देश में ईंधन का संकट पैदा न हो।
भारत और कुवैत के बीच के ऐतिहासिक संबंध हमेशा से मधुर रहे हैं, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में यह मदद भारत की ‘एनर्जी डिप्लोमेसी’ की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। जहाँ दुनिया भर के देश ऊर्जा संकट को लेकर आशंकित हैं, वहीं भारत को मिल रही यह प्राथमिकता देश की बढ़ती वैश्विक साख का प्रतीक है। आने वाले दिनों में अन्य खाड़ी देशों के साथ भी इसी तरह के सहयोग की उम्मीद की जा रही है ताकि ऊर्जा निर्भरता को सुरक्षित रखा जा सके।
