Indian Aviation: इंडिगो-एयर इंडिया के एकाधिकार पर लगेगी लगाम, सरकार ने दो नई एयरलाइंस को दी मंजूरी
Share this
नई दिल्ली। भारतीय हवाई यात्रा के इतिहास में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। वर्षों से देश के एविएशन सेक्टर पर हावी बड़ी एयरलाइंस—खासकर इंडिगो और टाटा समूह (एयर इंडिया)—के एकाधिकार को तोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दो नई एयरलाइंस अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया है।
सरकार का यह फैसला केवल नई एयरलाइंस को मंजूरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य हवाई यात्रियों को महंगे टिकट और खराब सेवाओं से राहत दिलाना है। वर्तमान में देश के घरेलू विमानन बाजार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ दो बड़े समूहों के पास है, जिससे प्रतिस्पर्धा की कमी और मनमाना किराया वसूला जाना आम बात हो गई थी।
हाल ही में इंडिगो की तकनीकी खराबी के कारण देशभर के एयरपोर्ट्स पर उड़ानों के रद्द होने और हजारों यात्रियों के फँसने की घटना ने इस समस्या को और उजागर कर दिया। इस घटना के बाद सरकार और एविएशन विशेषज्ञों ने माना कि सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब भारतीय आसमान में “स्वस्थ प्रतिस्पर्धा” को बढ़ावा दिया जाएगा। नई एयरलाइंस के आने से यात्रियों को सस्ते टिकट, बेहतर सेवाएं और ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद है।
अल हिंद एयर, जो केरल के एक बड़े टूरिज्म ग्रुप से जुड़ी है, दक्षिण भारत और खाड़ी देशों के बीच हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकती है। वहीं हैदराबाद आधारित फ्लाई एक्सप्रेस, जिसके पास कार्गो और लॉजिस्टिक्स का अनुभव है, यात्रियों के लिए अधिक कुशल सेवाएं देने में सक्षम होगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश पर फोकस करने वाली शंख एयर जैसी कंपनियां लखनऊ, वाराणसी और आगरा जैसे शहरों को बेहतर हवाई नेटवर्क से जोड़ सकती हैं।
सरकार का जोर अब रीजनल कनेक्टिविटी यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों को हवाई नक्शे पर लाने पर है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। उड्डयन मंत्रालय द्वारा हाल के दिनों में कई एविएशन स्टार्टअप्स से की गई बैठकें इस बदलाव की ओर इशारा करती हैं।
कुल मिलाकर, भारतीय एविएशन सेक्टर एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। नई एयरलाइंस के मैदान में उतरने से दिग्गज कंपनियों को अपनी सेवाओं और किराए में सुधार करना होगा। आने वाले महीनों में जब ये विमान उड़ान भरेंगे, तो हवाई यात्रियों को सफर का एक नया और बेहतर अनुभव मिलेगा।
