राजस्थान न्यूज़: “एक लोटा पानी ले आएं तो नाम बदल दूंगा”, यमुना जल मुद्दे पर गरमाई राजनीति, विपक्ष की सीधी चुनौती…NV News
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राजस्थान में यमुना जल समझौते को लेकर सियासत एक बार फिर चरम पर है। हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए हालिया एमओयू (MoU) के बाद जहां सत्ता पक्ष इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे सिरे से नकारते हुए सरकार को खुली चुनौती दी है। विपक्षी नेताओं ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार केवल कागजों पर समझौते कर रही है, वास्तविकता में शेखावाटी की प्यासी धरती तक पानी पहुँचाना नामुमकिन है। एक कद्दावर नेता ने यहाँ तक कह दिया, “अगर इस समझौते से राजस्थान की सीमा में एक लोटा यमुना का पानी भी आ जाए, तो मैं अपना नाम बदल दूंगा।”
यह विवाद 32 साल पुराने समझौते को लागू करने की कोशिशों के बीच उपजा है। दरअसल, हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों तक पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की योजना है। विपक्षी दलों का तर्क है कि हरियाणा खुद पानी की किल्लत झेल रहा है और तकनीकी रूप से पाइपलाइन के जरिए इतना पानी लाना संभव नहीं है। इस “नाम बदल देने” वाली चुनौती ने सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक नई बहस छेड़ दी है, जिससे भजनलाल सरकार के दावों की साख दांव पर लग गई है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वे केवल वादे नहीं कर रहे, बल्कि पाइपलाइन के एलाइनमेंट और डीपीआर (DPR) पर काम शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जनता को भ्रमित करना बंद करे, क्योंकि दशकों से अटकी यह योजना अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हकीकत बनने जा रही है। अब देखना यह है कि क्या 265 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन वाकई राजस्थान के खेतों तक यमुना का पानी पहुँचा पाती है या यह मुद्दा केवल चुनावी बयानों और “नाम बदलने” की चुनौतियों तक ही सीमित रह जाता है।
