Security Update: बंदूकें थमीं, पर जमीन में छिपा खतरा! IED ब्लास्ट की 1,277 घटनाएं दर्ज…NV News
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NV News Raipur: देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में भले ही बंदूकें शांत होती नजर आ रही हों, लेकिन जमीन के भीतर छिपा खतरा अब भी बरकरार है। Security Update के अनुसार साल 2001 से 2026 तक आईईडी (IED) ब्लास्ट की कुल 1,277 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए आईईडी आज भी सक्रिय हैं और समय-समय पर इनके कारण हादसे हो रहे हैं। ये विस्फोटक अक्सर कच्ची सड़कों, जंगलों और ग्रामीण इलाकों में दबाकर रखे जाते हैं, जिससे आम लोगों और सुरक्षा बलों को खतरा बना रहता है।
सुरक्षा बल लगातार Search Operation और डिमाइनिंग अभियान चला रहे हैं, ताकि इन छिपे हुए खतरों को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके। इसके लिए आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित टीमों की मदद ली जा रही है, जिससे जोखिम को कम किया जा सके।
इसके बावजूद, कई बार आईईडी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि इन्हें बेहद चालाकी से छिपाया जाता है। यही वजह है कि सुरक्षा बलों को हर कदम पर सतर्क रहना पड़ता है और स्थानीय लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
हालांकि नक्सल गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन यह आंकड़े बताते हैं कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में इन विस्फोटकों को पूरी तरह खत्म करना ही सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
