High court: SECR भर्ती मामला: वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में दायर की रिव्यू याचिका

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बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) में वर्ष 2010 की ग्रुप-डी भर्ती से जुड़े बहुचर्चित मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट के 5 दिसंबर 2025 के आदेश में आवश्यक संशोधन की मांग करते हुए रिव्यू याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए शेष रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की है।

 

क्या है पूरा मामला

SECR बिलासपुर द्वारा वर्ष 2010 में 5540 ग्रुप-डी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। चयन प्रक्रिया के बाद सभी 5540 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए, लेकिन इनमें से 624 अभ्यर्थियों ने नौकरी ज्वाइन नहीं की, जिससे बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए।

रेलवे के 2008 के नियमों के अनुसार इन रिक्त पदों को प्रतीक्षा सूची से भरना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके बाद वर्ष 2014 से 2019 के बीच 197 प्रतीक्षा सूची अभ्यर्थियों ने CAT बिलासपुर में याचिका दायर की, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया। इनमे से 110 अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का रुख किया, जहां से भी राहत नहीं मिली।

 

सुप्रीम कोर्ट से मिला अभ्यर्थियों को न्याय

हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वर्ष 2018 में ‘दिनेश कुमार कश्यप एवं अन्य बनाम रेलवे’ प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने CAT में याचिका दायर की थी, उन्हें नियुक्ति दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे ने CAT में केस करने वाले सभी 197 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए।

 

CAT का दोबारा अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला

इसके बाद भी शेष 427 रिक्त पदों को लेकर वर्ष 2019 से 2023 के बीच लगभग 60 प्रतीक्षा सूची अभ्यर्थियों ने CAT बिलासपुर और जबलपुर बेंच में याचिकाएं दायर कीं। सुनवाई के बाद CAT ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को नियुक्ति देने के निर्देश दिए।

 

रेलवे की हाई कोर्ट में चुनौती खारिज

रेलवे ने CAT के आदेश को हाई कोर्ट में 54 रिट याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी थी।

5 दिसंबर 2025 को जस्टिस रजनी दुबे और एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने रेलवे की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

 

हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि—

रिक्त पदों की प्रशासनिक ऑडिट कराई जाए

वैध रूप से रिक्त पद पाए जाने पर प्रतिस्थापन (वेटिंग) सूची से मेरिट के आधार पर नियुक्ति दी जाए

संपूर्ण प्रक्रिया 4 माह के भीतर पूरी की जाए

क्यों दायर की गई रिव्यू याचिका

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि—

2010 भर्ती की प्रतीक्षा सूची में कुल 1335 अभ्यर्थी हैं

इनमें से 197 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नियुक्ति मिल चुकी है

 

अब भी लगभग 427 पद रिक्त हैं

लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार यदि रेलवे पूरी प्रतीक्षा सूची (1138 अभ्यर्थी) में से मेरिट के आधार पर चयन करेगा, तो

वे अभ्यर्थी जिनका मेरिट नीचे है लेकिन जिन्होंने वर्षों से CAT में केस लड़कर इंतजार किया, उन्हें नुकसान हो सकता है,

जबकि जिन्होंने कभी केस नहीं किया, उन्हें लाभ मिलने की संभावना बन जाएगी।

इसी असमानता को दूर करने के लिए एक अभ्यर्थी ने हाई कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर की है, जो फिलहाल लंबित है।

 

पीड़ित पक्ष को CAT जाने की छूट

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी को लगता है कि रेलवे ने मनमाने ढंग से या CAT के आदेश के विपरीत कार्य किया है, तो वह पुनः CAT का दरवाजा खटखटा सकता है। न्यायिक समीक्षा का अधिकार खुला रहेगा।

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