High Court News: बकाया बिजली बिल पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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बिलासपुर। बकाया बिजली बिलों की वसूली को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि नीलामी के माध्यम से खरीदी गई संपत्ति पर यदि पूर्व मालिक का बिजली बिल बकाया है, तो नए मालिक को ही उसका भुगतान करना होगा। कोर्ट ने विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 की धारा 49 का हवाला देते हुए कहा कि यह वैधानिक शर्त है और खरीदार पर बाध्यकारी है।

यह फैसला पॉलीबॉन्ड रॉक फाइबर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनाया गया। कंपनी ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) और बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उससे अवैध रूप से पुराने बिजली बिल की वसूली की गई है और यह राशि ब्याज सहित वापस की जाए।

 

मामला क्या है?

दरअसल, अरिहंत रॉक वूल फाइबर प्राइवेट लिमिटेड राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव तहसील के बकल गांव में स्थित एक औद्योगिक संयंत्र का संचालन कर रही थी। कंपनी ने बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लिया था, लेकिन कर्ज चुकाने में असफल रहने पर बैंक ने SARFAESI Act, 2002 के तहत संपत्ति पर कब्जा कर लिया।

इसके बाद 19 अप्रैल 2012 को संपत्ति की ई-नीलामी की गई, जिसमें पॉलीबॉन्ड रॉक फाइबर प्राइवेट लिमिटेड ने भाग लिया और 2.62 करोड़ रुपये में संपत्ति खरीदी। बैंक ने चल-अचल संपत्ति का विक्रय प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें संपत्ति को सभी ज्ञात भारों से मुक्त बताया गया था।

 

बिजली कनेक्शन में सामने आई समस्या

जब याचिकाकर्ता कंपनी ने संयंत्र चालू करने के लिए CSPDCL से नया बिजली कनेक्शन मांगा, तब पता चला कि पूर्व मालिक अरिहंत पर वर्ष 2008 से बिजली बिल बकाया है और इसी कारण कनेक्शन स्थायी रूप से काट दिया गया था। बिजली कंपनी ने नया कनेक्शन देने से पहले 17.67 लाख रुपये के बकाया भुगतान की शर्त रखी।

तत्काल बिजली आपूर्ति के लिए याचिकाकर्ता ने यह राशि जमा कर दी, लेकिन बाद में इसे अवैध बताते हुए वापसी की मांग की।

 

हाई कोर्ट का स्पष्ट रुख

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नीलामी ‘जैसा है जहां है’ (As Is Where Is) आधार पर की गई थी, जिसका अर्थ है कि संपत्ति से जुड़े सभी अधिकार, दायित्व और देनदारियां खरीदार को हस्तांतरित हो जाती हैं।

कोर्ट ने कहा कि यदि किसी परिसर में बिजली आपूर्ति पहले से बंद है, तो एक समझदार खरीदार को उसके कारणों की जांच करनी चाहिए। ऐसे में यह तर्क स्वीकार्य नहीं है कि खरीदार को बकाया बिजली बिल की जानकारी नहीं थी।

 

धारा 49 का हवाला

कोर्ट ने साफ कहा कि विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 की धारा 49 के तहत, नया कनेक्शन देने से पहले पुराने बकाया का भुगतान अनिवार्य है। यह वैधानिक शर्त है और इससे छूट नहीं दी जा सकती।

 

याचिका खारिज

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और बिजली कंपनी द्वारा की गई बकाया वसूली को पूरी तरह से वैध ठहराया।

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