ग्रीन गुफा पर संकट: हजारों साल पुराना इकोसिस्टम खतरे में! हाईकोर्ट सख्त, कांगेर वैली नेशनल पार्क प्रबंधन से मांगा जवाब…NV News
Share this
Raipur: छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित कांगेर वैली नेशनल पार्क की अनमोल ‘ग्रीन केव’ (हरित गुफा) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि गुफा के आसपास हो रहे अनियंत्रित निर्माण कार्यों से यहाँ का हजारों साल पुराना दुर्लभ इकोसिस्टम पूरी तरह नष्ट हो सकता है। यह मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहाँ एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने नेशनल पार्क प्रबंधन को नोटिस जारी कर इस संबंध में विस्तृत शपथ-पत्र (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
वैज्ञानिकों का तर्क है कि ‘ग्रीन केव’ की दीवारों पर मिलने वाली विशेष काई (Algae) और वहां का सूक्ष्म वातावरण (Micro-climate) अत्यंत संवेदनशील है। गुफा के भीतर और आसपास कंक्रीट का निर्माण, बिजली की तेज रोशनी और पर्यटकों की अनियंत्रित आवाजाही से वहां के तापमान और आर्द्रता में बदलाव आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गुफा भू-गर्भीय संरचना (Geological Structure) की दृष्टि से वैश्विक धरोहर के समान है, जिसे पर्यटन के नाम पर नुकसान पहुंचाना आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि नेशनल पार्क प्रबंधन और पर्यटन विभाग द्वारा नियमों को ताक पर रखकर गुफा के पास बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारी मशीनरी के उपयोग और तोड़फोड़ से गुफा की प्राकृतिक संरचना में दरारें आ सकती हैं। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि पर्यावरण के संरक्षण के बिना पर्यटन विकास की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने पूछा है कि निर्माण शुरू करने से पहले क्या विशेषज्ञों की टीम से ‘इम्पैक्ट असेसमेंट’ कराया गया था?
इस विवाद के बाद बस्तर के पर्यावरण प्रेमियों में गहरा रोष है। कांगेर वैली नेशनल पार्क अपनी अद्वितीय जैव विविधता और चूना पत्थर की गुफाओं (जैसे कुटुंबसर और कैलाश गुफा) के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। ‘ग्रीन केव’ की विशेषता उसका विशिष्ट हरा रंग है, जो प्रकाश और नमी के खास मेल से बनता है। यदि यहाँ का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा, तो यह दुर्लभ दृश्य हमेशा के लिए लुप्त हो सकता है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और पार्क प्रबंधन द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।
ग्रीन केव की खासियत और खतरे (Quick Summary)
विशेषता: चूना पत्थर की दीवारों पर उगने वाली दुर्लभ काई जो गुफा को ‘हरा’ रंग देती है।
वैज्ञानिक महत्व: हजारों वर्षों में निर्मित स्टैलेक्टाइट्स (Stalactites) और स्टैलेग्माइट्स (Stalagmites)।
मुख्य खतरा: पर्यटकों का शोर, कृत्रिम प्रकाश, कंक्रीट निर्माण और मानवीय हस्तक्षेप।
कोर्ट का रुख: निर्माण कार्यों पर स्पष्टीकरण और शपथ-पत्र की मांग।
