राज्यपाल श्री रमेश बैस (डेका) ने दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल और ऑडियो पुस्तकों का किया विमोचन; समावेशी शिक्षा पर दिया जोर…NV News

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राज्यपाल श्री रमेश बैस (डेका) ने राजभवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ज्ञान पर किसी एक वर्ग का अधिकार नहीं है, बल्कि यह समाज के हर व्यक्ति के लिए सुलभ होना चाहिए। यह पहल उन छात्रों के लिए मील का पत्थर साबित होगी जो अपनी शारीरिक सीमाओं के कारण सामान्य पठन-सामग्री का उपयोग नहीं कर पाते थे।

शिक्षा में तकनीक का समावेश

विमोचित की गई ऑडियो बुक्स के बारे में चर्चा करते हुए राज्यपाल ने तकनीक की भूमिका की सराहना की। उन्होंने बताया कि आधुनिक युग में ऑडियो फॉर्मेट ज्ञान प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इन ऑडियो बुक्स के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थी न केवल अपनी पाठ्यपुस्तकों को सुन सकेंगे, बल्कि वे जटिल विषयों को भी आसानी से समझ पाएंगे, जिससे उनके सीखने की गति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

ब्रेल लिपि का महत्व और सशक्तिकरण

ब्रेल पुस्तकों के विमोचन पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि ब्रेल लिपि दृष्टिबाधितों के लिए साक्षरता का आधार है। नई पुस्तकों का विमोचन यह सुनिश्चित करता है कि छात्र अपनी उंगलियों के स्पर्श से दुनिया को पढ़ सकें और स्वतंत्र रूप से अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। यह कदम ‘दिव्यांगजन’ को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास है।

समावेशी समाज का निर्माण

अपने संबोधन के दौरान श्री डेका ने शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और अधिक ‘समावेशी’ (Inclusive) बनाएं। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि कई बार संसाधनों के अभाव में प्रतिभाएं पीछे छूट जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और राजभवन ऐसी बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।

भविष्य की योजनाएं और संकल्प

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने इस परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थाओं को बधाई दी। उन्होंने भविष्य में और भी अधिक विषयों और भाषाओं में ब्रेल और ऑडियो सामग्री उपलब्ध कराने का संकल्प दोहराया। इस पहल को ‘सुगम्य भारत अभियान’ के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसका अंतिम लक्ष्य हर नागरिक को समान शैक्षणिक अधिकार और संसाधन प्रदान करना है।

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