बस्तर से वैश्विक मान तक: छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई उड़ान; नक्सलवाद की जगह अब सैलानियों की पहली पसंद…NV News
Share this
छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जो कभी केवल अपनी जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सली चुनौतियों के लिए जाना जाता था, आज अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दम पर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से उभरा है। राज्य सरकार की नई पर्यटन नीति और ‘बस्तर मॉडल’ के सफल क्रियान्वयन ने इस अंचल को दुनिया भर के सैलानियों के लिए एक ‘मस्ट विजिट’ डेस्टिनेशन बना दिया है।
बस्तर मॉडल: सुरक्षा के साथ समृद्धि
पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास और सुरक्षा के मोर्चे पर मिली सफलता ने पर्यटन को संजीवनी दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर के लक्ष्य के साथ विकास कार्यों को गति दी है। होम-स्टे (Home Stay) योजना ने स्थानीय आदिवासियों को सीधे पर्यटन से जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है।
प्रमुख आकर्षण जो खींच रहे दुनिया का ध्यान:
भारत का नियाग्रा (चित्रकोट): चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर्स और ट्रैवल ब्लॉगर्स के लिए यह पसंदीदा स्थल बन गया है।
तीरथगढ़ और कुटुमसर गुफाएं: प्राकृतिक अजूबों और प्राचीन गुफाओं के संरक्षण ने शोधकर्ताओं और एडवेंचर प्रेमियों को आकर्षित किया है।
जनजातीय संस्कृति: बस्तर का प्रसिद्ध 75 दिनों का दशहरा और स्थानीय मड़ई मेले अब विदेशी पर्यटकों की सूची में शीर्ष पर हैं।
अबूझमाड़ की अनछुई सुंदरता: सरकार द्वारा अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों को पर्यटन के लिए खोलने से इको-टूरिज्म और साहसिक खेलों (Adventure Sports) को बढ़ावा मिला है।
वैश्विक पहचान के लिए ठोस कदम
बजट 2026-27 में बस्तर के पर्यटन केंद्रों के सौंदर्यीकरण और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया गया है। जगदलपुर एयरपोर्ट के विस्तार और नई उड़ानों ने दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई जैसे बड़े शहरों से बस्तर की दूरी कम कर दी है। सरकार अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों (जैसे ITB Berlin) में बस्तर की ब्रांडिंग कर रही है, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में 30% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
