पूर्व CM भूपेश बघेल का बजट पर तीखा हमला: “मोदी जी ने अब हाथ खींचना शुरू कर दिया है”…NV news
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रायपुर: केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। बघेल ने बजट को आम जनता के लिए पूरी तरह से निराशाजनक करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता से “हाथ खींचना” (कटिंग कॉर्नर्स) शुरू कर दिया है।
1. उम्मीदों पर फिरा पानी, हाथ लगा ‘झुनझुना’
भूपेश बघेल ने बजट को एक “झुनझुना” बताते हुए कहा कि इसमें मध्यम वर्ग, युवाओं और किसानों के लिए कुछ भी ठोस नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार केवल बड़े-बड़े शब्दों और दावों का मायाजाल बुन रही है, जबकि धरातल पर महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता को कोई राहत नहीं मिली है। उनके अनुसार, यह बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी है।
2. कल्याणकारी योजनाओं में कटौती का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मोदी सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि “मोदी जी अब हाथ खींचने लगे हैं”। उनका इशारा उन सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की ओर था जिनमें बजट के माध्यम से कटौती की गई है। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गरीबों के हक का पैसा काटकर कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुँचाने की नीति पर काम कर रही है।
3. किसान और युवा हाशिए पर
बघेल ने कृषि क्षेत्र की अनदेखी पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए यह बजट शून्य है। न तो धान के समर्थन मूल्य पर कोई ठोस आश्वासन मिला और न ही किसानों की आय दोगुनी करने का कोई खाका दिखा। युवाओं के रोजगार पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की बात करना तब तक बेमानी है जब तक देश का युवा बेरोजगार है।
4. छत्तीसगढ़ की अनदेखी का दावा
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बघेल ने कहा कि राज्य की विशिष्ट जरूरतों और रेल परियोजनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ को केवल संसाधनों (खनिजों) के दोहन का केंद्र मानती है, लेकिन यहाँ के बुनियादी ढांचे और जन कल्याण के लिए फंड देने में हमेशा पीछे रहती है।
5. “महंगाई और जीएसटी ने तोड़ी कमर”
अंत में, बघेल ने बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों और जीएसटी की जटिलताओं पर कोई बात न करना यह दर्शाता है कि सरकार जनता की पीड़ा से कितनी दूर है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का आर्थिक दृष्टिकोण देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक गहरे संकट में डाल देगा और मध्यम वर्ग के लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा।
