जंगल बने अवैध जुआ-सट्टे का अड्डा: लाखों की रोज कमाई, पुलिस की ‘चुप्पी’ पर उठे सवाल
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कोरबा। जिले के गोढ़ी, चाकामार और कोरकोमा के घने जंगल इन दिनों अवैध जुआ-सट्टे के हॉटस्पॉट बन चुके हैं। प्रतिदिन लाखों रुपये का खेल यहां खेला जा रहा है, और पुलिस प्रशासन की चुप्पी ने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील और संदिग्ध बना दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत और ‘सेटिंग’ के कारण यह काला कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है।
जंगलों में रात-दिन जुआ—एंट्री शुल्क 500, कमाई हर घंटे 50 हजार
सूत्रों के अनुसार जंगलों में ‘बावन परी’ जैसे खेलों के नाम पर खुलेआम जुआ चल रहा है।
संचालक हर घंटे 50 हजार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।
जुआ खेलने वाले हर व्यक्ति से 500 रुपये प्रवेश शुल्क वसूला जा रहा है।
कोरबा, जांजगीर-चांपा, गेवरा, दीपका और उरगा से सैकड़ों लोग रोजाना जंगल पहुंच रहे हैं।
यह अवैध गतिविधि न सिर्फ सामाजिक वातावरण को प्रभावित कर रही है, बल्कि क्षेत्र में अपराध बढ़ने का खतरा भी बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप—पुलिस की ‘सेटिंग’ से चल रहा पूरा खेल
स्थानीय ग्रामीणों ने दावा किया है कि पुलिस प्रशासन के कुछ अधिकारी नियमित आर्थिक लाभ लेकर जुआ संचालकों को संरक्षण दे रहे हैं।
कुछ औपचारिक छापों को छोड़ दें तो अब तक किसी बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके कारण जुआ संचालन की जड़ें और मजबूत होती जा रही हैं।
हरिराम साहू—जंगल जुआ नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे जुआ साम्राज्य का सरगना हरिराम साहू नाम का व्यक्ति है।
वह कथित तौर पर दावा करता है कि वह—
साइबर सेल
उरगा थाना
करतला थाना
सिविल लाइन थाना
तक नियमित ‘महीना’ भेजता है, और यहां तक कि राजपत्रित अधिकारियों तक रकम पहुंचने की बातें भी खुलेआम करता है।
एसपी की ईमानदार छवि के बावजूद कार्रवाई गायब—कौन डाल रहा दबाव?
कोरबा एसपी सिद्धार्थ तिवारी की ईमानदार और सख्त छवि जगजाहिर है।
लेकिन सवाल यह है कि—
पुलिस इस जुआ नेटवर्क पर हाथ डालने से क्यों बच रही है?
हरिराम साहू पर कार्रवाई में हिचक क्यों?
क्या कोई ‘बड़ा आका’ पर्दे के पीछे सक्रिय है?
इन सवालों ने पूरे जिले में चर्चा गर्म कर दी है।
जनता की मांग—ड्रोन निगरानी, मनी ट्रेल जांच और बड़े स्तर की रेड
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
जंगलों में ड्रोन सर्विलांस शुरू किया जाए
जुआ नेटवर्क की मनी ट्रेल जांच की जाए
बड़े स्तर पर संयुक्त छापेमारी कर इस अवैध साम्राज्य को खत्म किया जाए
बिना कार्रवाई यह नेटवर्क बनेगा कानून-व्यवस्था के लिए खतरा
यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह अवैध जुआ तंत्र न सिर्फ सामाजिक संतुलन बिगाड़ेगा, बल्कि कानून-व्यवस्था की रीढ़ को भी कमजोर कर देगा।
अब बड़ा सवाल:
कोरबा के जंगलों में चल रहे जुए के अड्डे कब खत्म होंगे—और पुलिस की चुप्पी आखिर किसके लिए है?
