‘हिंसा के जंगलों में खिला प्रेम का फूल’: बस्तर में 4 आत्मसमर्पित नक्सली जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, पुलिस बनी बाराती…NV News
Share this
कभी बस्तर के घने जंगलों में सुरक्षाबलों के खिलाफ बंदूक तानने वाले हाथ अब सात जन्मों के अटूट बंधन में बंध गए हैं। ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइये) अभियान से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण करने वाले चार जोड़ों का विवाह पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन में आयोजित किया गया, जहाँ हिंसा की गूंज की जगह शहनाइयों की धुन सुनाई दी।
पुलिस अधिकारी बने ‘कन्यदान’ के साक्षी
इस अनोखी शादी में बस्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जवान स्वयं बाराती और घराती बने। पुलिस अधिकारियों ने न केवल व्यवस्था संभाली, बल्कि नवविवाहित जोड़ों को उपहार भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह दृश्य उस बदलाव की गवाह बना, जहाँ कल तक जो एक-दूसरे के आमने-सामने थे, आज वे खुशियों के इस उत्सव में साथ खड़े नजर आए।
भय मुक्त और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत
आत्मसमर्पित जोड़ों ने बताया कि संगठन (नक्सलवाद) में रहते हुए वे हमेशा डर और असुरक्षा के साये में रहते थे, जहाँ निजी जीवन और विवाह जैसी खुशियों की कोई जगह नहीं थी। सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस के मानवीय व्यवहार ने उन्हें मुख्यधारा में लौटने और एक सामान्य परिवार बसाने का साहस दिया।
‘लोन वर्राटू’ अभियान की एक और सफलता
दंतेवाड़ा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत अब तक सैकड़ों माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। पुलिस का लक्ष्य केवल आत्मसमर्पण कराना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार, आवास और सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाना भी है। इन चार जोड़ों का विवाह इसी पुनर्वास प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अन्य नक्सलियों को भी समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेगा।
बदलते बस्तर की नई तस्वीर
यह सामूहिक विवाह इस बात का प्रतीक है कि बस्तर की धरती अब रक्तरंजित संघर्ष से ऊब चुकी है और शांति व प्रेम की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार और पुलिस प्रशासन का यह मानवीय चेहरा नक्सलियों के खोखले दावों को ध्वस्त कर रहा है। नवदंपतियों ने संकल्प लिया है कि वे अब लोकतंत्र के सिपाही बनकर समाज के विकास में अपना योगदान देंगे।
