जंगलों में हाथियों का तांडव: लकड़ी लेने गए बुजुर्ग को हाथी ने कुचला, मौके पर ही हुई दर्दनाक मौत, ग्रामीणों में भारी दहशत…NV News
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छत्तीसगढ़ के वनांचलों में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में, जंगल में सूखी लकड़ी इकट्ठा करने गए एक बुजुर्ग को दंतैल हाथी ने बेरहमी से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जंगल की सीमा के करीब गया था, तभी अचानक एक हाथी से उसका सामना हो गया। भागने का मौका न मिल पाने के कारण हाथी ने बुजुर्ग को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उसकी मौके पर ही सांसें थम गईं। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद विभाग द्वारा पर्याप्त निगरानी नहीं की जा रही है और न ही ग्रामीणों को समय पर अलर्ट जारी किया जा रहा है। जंगली हाथियों के रिहायशी इलाकों के करीब आने से अब ग्रामीणों का घर से निकलना भी दूभर हो गया है।
वन विभाग के अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि हाथियों का दल वर्तमान में इसी क्षेत्र में विचरण कर रहा है, जिसके कारण खतरा बना हुआ है। हाथियों के कॉरिडोर और उनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए ‘एलिफेंट ट्रैकर्स’ को तैनात किया गया है, लेकिन घने जंगलों के कारण कई बार हाथियों की लोकेशन का सटीक पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और हाथियों को देखने पर उन्हें छेड़ने की कोशिश कतई न करें।
छत्तीसगढ़ के कई जिले जैसे सरगुजा, जशपुर और कोरबा लंबे समय से मानव-हाथी द्वंद्व (Human-Elephant Conflict) का दंश झेल रहे हैं। फसलों की बर्बादी के साथ-साथ अब इंसानी जानों का जाना एक गंभीर समस्या बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी के कारण हाथी गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार द्वारा ‘हाथी मित्र’ दल और सोलर फेंसिंग जैसे प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में इस तरह की जानलेवा घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
