डिजिटल क्रांति से बदलेगा छत्तीसगढ़ का ‘जस्टिस सिस्टम’: नए कानूनों से पीड़ितों को तुरंत मिलेगा न्याय, तकनीक से नपेंगे अपराधी!…NV News
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रायपुर न्यूज़: राजधानी रायपुर में आयोजित ‘स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस’ राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल तकनीकों के प्रभाव पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 150 साल पुराने औपनिवेशिक कानूनों की जगह आए नए भारतीय कानूनों का मुख्य मकसद आम नागरिक को सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय दिलाना है।
कार्यक्रम एवं नई न्याय प्रणाली से जुड़ी प्रमुख बातें:
डिजिटल सबूतों को मिली कानूनी मजबूती: नए कानूनों के तहत सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और वैज्ञानिक फॉरेंसिक रिपोर्ट को कानूनी मान्यता मिल चुकी है। राज्य के सभी पुलिस थाने अब ऑनलाइन मोड में हैं, जहाँ अब तक 1.97 लाख से अधिक ऑनलाइन एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।
डिजिटल जस्टिस में छत्तीसगढ़ रहेगा सबसे आगे: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि ई-साक्ष्य, ई-समन और ‘न्याय श्रुति’ (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) जैसे माध्यमों से न्याय प्रणाली बेहद मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि जून महीने में ही जिला अदालतों में 9,910 तथा हाईकोर्ट में 58 मामलों की सुनवाई वीसी से की गई।
फास्ट-ट्रैक डिलीवरी के लिए आईसीजेएस: इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के जरिए पुलिस, कोर्ट, जेल और अभियोजन पक्ष आपस में डिजिटल रूप से जुड़ गए हैं, जिससे कागजी लेट-लतीफी खत्म हो रही है।
‘वन डेटा, वन एंट्री’ पर काम: गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मैनुअल एफआईआर की परंपरा खत्म कर डिजिटल फॉरेंसिक, नेफिस और ई-साक्ष्य के जरिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पेंडेंसी खत्म करने का लक्ष्य है।
कार्यक्रम में विधि मंत्री गजेंद्र यादव, डीजीपी अरुण देव गौतम समेत न्यायपालिका, पुलिस और विधि विशेषज्ञ बड़ी संख्या में शामिल हुए।

