छत्तीसगढ़ में ड्रग माफियाओं पर नकेल: प्रदेश के 10 जिलों में गठित होगी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, बजट में मिली वित्तीय मंजूरी…NV News
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छत्तीसगढ़ को नशा मुक्त बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश के 10 संवेदनशील जिलों में अब जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन किया जाएगा। इस विशेष बल का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना और स्थानीय स्तर पर ड्रग नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में आवश्यक धनराशि का प्रावधान भी कर दिया है।
सरकार ने जिन 10 जिलों का चयन टास्क फोर्स के लिए किया है, उनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, जगदलपुर और राजनांदगांव जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं। इन जिलों में नशीली दवाओं और पदार्थों के अवैध व्यापार की सूचनाएं लगातार मिल रही थीं। टास्क फोर्स के गठन से पुलिस विभाग को विशेष अधिकार और संसाधन प्राप्त होंगे, जिससे वे अंतर्राज्यीय तस्करों के खिलाफ अधिक प्रभावी ढंग से ऑपरेशन चला सकेंगे।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में पुलिस के अनुभवी अधिकारियों के साथ-साथ विशेष जासूसी दस्ते और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। बजट में प्रावधानित राशि का उपयोग आधुनिक उपकरणों, सर्विलांस सिस्टम और टास्क फोर्स के लिए अलग से वाहनों की खरीद में किया जाएगा। यह फोर्स सीधे तौर पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ समन्वय बनाकर काम करेगी, जिससे ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ा जा सके।
राज्य सरकार की इस पहल का मुख्य फोकस युवाओं को नशे के जाल से बचाना है। पिछले कुछ वर्षों में स्कूल और कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें बढ़ी हैं। यह टास्क फोर्स न केवल अपराधियों को पकड़ेगी, बल्कि जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज को नशे के खिलाफ जागरूक भी करेगी। पुलिस मुख्यालय (PHQ) अब इन जिलों में पदों की भर्ती और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू करने जा रहा है।
कैबिनेट के इस फैसले से छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था को नया आयाम मिलेगा। जानकारों का मानना है कि बजट में वित्तीय प्रावधान होने से इस फोर्स का काम कागजों से निकलकर हकीकत में तेजी से शुरू होगा। यह कदम राज्य के “नशा मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान को गति प्रदान करेगा और आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इस मॉडल को विस्तार दिया जा सकता है।
