कर्तव्य पथ पर गूंजा छत्तीसगढ़ के जनजातीय शौर्य का इतिहास, जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की भव्य झांकी बनी आकर्षण का केंद्र…NV News
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77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी अनूठी पहचान छोड़ी। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी ‘जनजातीय डिजिटल संग्रहालय’ (Tribal Digital Museum) के विषय पर आधारित थी, जिसने देश-दुनिया के सामने राज्य की समृद्ध लोक परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम को प्रदर्शित किया। जैसे ही झांकी मुख्य मंच के सामने से गुजरी, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
गौरवशाली इतिहास और डिजिटल विजन का संगम
झांकी के अग्रभाग में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों के शौर्य की झलक दिखाई गई, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। झांकी के मध्य और पिछले हिस्से में डिजिटल इंडिया की तर्ज पर राज्य के जनजातीय जीवन, कला, और शिल्प को आधुनिक स्क्रीन और इंटरैक्टिव पैनल के जरिए प्रदर्शित किया गया। यह झांकी बताती है कि कैसे छत्तीसगढ़ अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भविष्य की तकनीक को अपना रहा है।
बस्तर के कलाकारों का जीवंत प्रदर्शन
झांकी के साथ चल रहे छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नर्तक दलों ने अपने लयबद्ध प्रदर्शन से सबका मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और मांदर की थाप पर थिरकते कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की जीवंत संस्कृति को दिल्ली के हृदय स्थल पर उतार दिया। झांकी में गौर नृत्य और बस्तर के पारंपरिक वाद्य यंत्रों का अद्भुत संयोजन देखने को मिला, जो राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की सराहना
कर्तव्य पथ पर मौजूद विदेशी अतिथियों और देश के गणमान्य नागरिकों ने छत्तीसगढ़ के इस प्रदर्शन की मुक्त कंठ से सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि जनजातीय इतिहास को डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत करने का विचार न केवल अभिनव है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सफलता पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया है।
‘विकसित भारत’ में छत्तीसगढ़ का योगदान
यह झांकी न केवल एक कलात्मक प्रस्तुति थी, बल्कि यह ‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन में छत्तीसगढ़ की भागीदारी का प्रतीक भी रही। राज्य सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के विकास और उनकी कला को वैश्विक मंच प्रदान करने के प्रयासों को इस झांकी के माध्यम से बखूबी दर्शाया गया। दिल्ली के आसमान में छत्तीसगढ़िया संस्कृति की गूंज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य की विरासत कितनी वैभवशाली है।
