छत्तीसगढ़ का ‘डिजिटल धान’ मॉडल: एआई और रीयल-टाइम मॉनिटिरिंग से भ्रष्टाचार पर प्रहार; सरकार ने बचाए ₹2,780 करोड़….NV News

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स से लैस कर देश के सामने एक मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मार्कफेड (MARKFED) द्वारा लागू की गई इस ‘डेटा-संचालित’ प्रणाली ने वित्त वर्ष 2025–26 में सरकारी खजाने को लगभग ₹2,780 करोड़ की चपत लगने से बचाया है। यह बचत बिना किसी कटौती के, केवल सिस्टम की कमियों और फर्जी प्रविष्टियों को डिजिटल तरीके से रोककर हासिल की गई है।

AI टेक्नोलॉजी ने कैसे बदली तस्वीर?

राज्य के सभी 2,739 धान उपार्जन केंद्रों को एक हाई-टेक नेटवर्क से जोड़ा गया है। इस मॉडल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC): रायपुर में स्थापित इस सेंटर से हर खरीदी केंद्र की रीयल-टाइम निगरानी की जाती है।

AI आधारित CCTV: ये कैमरे केवल रिकॉर्डिंग नहीं करते, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों, जैसे कि अवैध परिवहन या धान की बोरियों की हेराफेरी को खुद पहचानकर अलर्ट भेजते हैं।

डेटा-संचालित सत्यापन: किसानों के रकबे और उपज का मिलान सैटेलाइट इमेज और डिजिटल रिकॉर्ड से किया जाता है, जिससे ‘फर्जी पंजीकरण’ पूरी तरह खत्म हो गया है।

त्वरित भुगतान: तकनीक के इस्तेमाल से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और 23 लाख से अधिक किसानों को 48 घंटे के भीतर सीधे उनके खातों में भुगतान किया जा रहा है।

वित्तीय सफलता के आंकड़े (2025-26):

इस वर्ष राज्य ने कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की। पिछले वर्ष (149.24 लाख मीट्रिक टन) की तुलना में करीब 8 लाख टन की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी उत्पादन गिरने से नहीं, बल्कि सीमावर्ती राज्यों से आने वाले अवैध धान और फर्जी एंट्रीज पर सख्ती से रोक लगाने के कारण आई है।

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