छत्तीसगढ़ में खाद की किल्लत से परेशान किसान: यूरिया-डीएपी के लिए घंटों लाइन में लग रहे अन्नदाता, जबरन थमाई जा रही दवाइयां…NV News
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NV News मुंगेली/रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के सामने यूरिया और डीएपी (DAP) खाद की उपलब्धता को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि शासन ने किसानों के रकबे के आधार पर पारदर्शी तरीके से किस्तों में खाद वितरण की योजना बनाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह पूरी व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। मुंगेली और रायपुर सहित कई जिलों से आ रही खबरों के मुताबिक, अन्नदाताओं को अपनी ही फसलों के लिए खाद जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पर्याप्त और समय पर आपूर्ति न होने से खेती-किसानी के काम पिछड़ रहे हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।
किसानों का आरोप है कि खाद सोसायटियों और दुकानों पर यूरिया व डीएपी लेने के लिए उन्हें सुबह से लेकर शाम तक घंटों लंबी कतारों में भूखे-प्यासे खड़े रहना पड़ रहा है। इसके बावजूद उन्हें एक बार में पूरी खाद सामग्री नहीं दी जा रही है। जानबूझकर उन्हें दो से तीन अलग-अलग किस्तों में खाद बांटी जा रही है, जिसके कारण किसानों को बार-बार अपने काम छोड़कर समितियों और निजी दुकानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
इस किल्लत के बीच, कुछ खाद विक्रेताओं द्वारा किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने के बेहद गंभीर मामले भी सामने आए हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि जब वे अपनी भूमि के दस्तावेज (बी-1) और खेत की पर्ची लेकर यूरिया लेने दुकानदारों के पास जा रहे हैं, तो उन पर प्रति बोरी 300 से 400 रुपये की अतिरिक्त कीटनाशक दवाइयां या गैर-जरूरी कृषि उत्पाद खरीदने का जबरन दबाव बनाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि यह दवाइयां उनकी फसल के लिए बिल्कुल भी उपयोगी नहीं हैं, लेकिन खाद की सख्त जरूरत के कारण वे इसे मजबूरी में खरीद रहे हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से इस कथित कालाबाजारी और दबाव की तुरंत जांच कर दोषी दुकानदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

